कॅडबरी की चॉकलेट सैंपल में निकले सफेद कीड़े-जाले
हैदराबाद। मशहूर कंपनी कॅडबरी की चॉकलेट सफेद कीड़ों और जालों से संक्रमित मिली है। ग्राहक ने इसकी शिकायत की है, जिसकी जांच के बाद कंपनी ने सफाई दी है। दरअसल चॉकलेट में रेंगता कीड़ा पाए जाने पर ग्राहक रॉबिन विनय कुमार ने ग्रेटर हैदराबाद नगर निगम (जीएचएमसी) से शिकायत की थी। निगम ने संबंधित स्टोर से कुछ और चॉकलेट लेकर जांच के लिए तेलंगाना की राज्य प्रयोगशाला में भेजा। जांच में खुलासा हुआ कि नमूनों में सफेद कीड़े और जाले लगे थे। हालांकि, अधिकारियों ने रिपोर्ट को कॅडबरी के सारे चॉकलेट नहीं, बल्कि सिर्फ लिए गए नमूनों तक सीमित बताया है। एक्स पर जारी एक पोस्ट में रॉबिन ने प्रयोगशाला की विश्लेषण रिपोर्ट के अंश शेयर किए है। इसके मुताबिक, कॅडबरी डेयरी मिल्क चॉकलेट (रोस्ट आलमंड) खाद्य सुरक्षा एवं गुणवत्ता कानून के तहत खाने योग्य नहीं है। लैब में चॉकलेट के सैंपल की जांच विभिन्न पैमानों पर की गई है, जैसे नमी, वसा व चीनी की मात्रा शामिल हैं। खाद्य सामग्री में इस्तेमाल होने वाले रंग के इस्तेमाल से जुड़े पहलू पर भी प्रयोगशाला में जांच की गई।
विवादित चॉकलेट सैंपल पर तेलंगाना की राजकीय प्रयोगशाला ने बताया कि नमूने में नमी 4.86 फीसदी, वसा 31.71 फीसदी व एसिड इनसॉल्यूबल एश 0.089 फीसदी मिला। नियमानुसार, चॉकलेट में वसा की मात्रा 25 फीसदी से कम, एसिड इनसॉल्यूबल एश 0.2 फीसदी से अधिक नहीं होनी चाहिए। कृमि जैसे बाहरी तत्व नहीं होने चाहिए। हालांकि, नमूना इन पैमानों पर खरा नहीं उतरा है। नाराज उपभोक्ता रॉबिन ने अपनी खरीदारी का सबूत दिखाते हुए चॉकलेट के साथ बिल भी एक्स हैंडल पर शेयर किया। इस मामले के सामने आने के बाद कई यूजर्स ने अपने अलग-अलग अनुभव बताए हैं।
तेलंगाना में खराब गुणवत्ता की चॉकलेट का मामला सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने के बाद कॅडबरी चॉकलेट निर्माता मॉन्डेलेज इंडिया ने सफाई दी कि कंपनी गुणवत्ता में अंतरराष्ट्रीय मानक का पालन करती है। खाद्य सुरक्षा की यह सबसे समग्र सुरक्षा प्रणाली है, जो सुनिश्चित करती है कि उत्पाद किसी भी तरह के भौतिक, रासायनिक और माइक्रोबायोलॉजिकल संक्रमण से बचे रहें। कंपनी के प्रवक्ता ने कहा कि विवादित बैच के अन्य नमूनों की जांच में पाया कि बनाने के दौरान इसमें कोई कमी नहीं थी।
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