'अब आगे क्या होगा?' HC के निर्देश से यमुना खादर के लोगों में बढ़ी चिंता
नई दिल्ली। दिल्ली के मयूर विहार यमुना खादर क्षेत्र में इन दिनों दहशत और अनिश्चितता का साया है। दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा ओ-जोन में बनी संपत्तियों को हटाने के आदेश जारी होने के बाद से यहां के हजारों बाशिंदों की रातों की नींद उड़ चुकी है। अपना आशियाना छिन जाने का डर यहां के हर शख्स के चेहरे पर साफ पढ़ा जा सकता है। अदालत के इस फैसले के बाद से पूरे इलाके में मायूसी और घबराहट का माहौल है, जहां लोग इस चिंता में रातें गुजार रहे हैं कि न जाने कब उनके आशियाने पर बुलडोजर चल जाए।
पुनर्वास की नीति न होने से बढ़ीं मुश्किलें
यमुना खादर में रहने वाले कई परिवारों का दर्द है कि वे पीढ़ियों से इसी मिट्टी पर बसते आ रहे हैं। अब अचानक उन्हें जगह खाली करने का फरमान सुना दिया गया है। स्थानीय लोगों का सवाल है कि यदि बिना किसी तैयारी के उन्हें उजाड़ दिया गया, तो वे अपने परिवार को लेकर कहां शरण लेंगे। प्रशासन की तरफ से अब तक विस्थापितों के लिए किसी भी तरह की ठोस पुनर्वास योजना या वैकल्पिक व्यवस्था की घोषणा नहीं की गई है, जिससे बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों समेत हर कोई गहरे मानसिक तनाव से गुजर रहा है।
यमुना बाजार की कार्रवाई से सहमे लोग
बीते दिनों यमुना बाजार इलाके में हुई प्रशासनिक बेदखली की कार्रवाई ने इन लोगों के डर को दोगुना कर दिया है। उस घटना को देखने के बाद से मयूर विहार खादर के निवासियों के मन में यह खौफ बैठ गया है कि वे अब अपने ही घरों में सुरक्षित नहीं हैं। दिन-रात रोजमर्रा के काम करते हुए भी महिलाओं और बुजुर्गों के दिमाग में सिर्फ यही अनिश्चितता घूमती रहती है कि उनका आने वाला कल कैसा होगा और क्या वे बेघर हो जाएंगे।
भविष्य की सुरक्षा और आशियाने को बचाने की गुहार
प्रभावित परिवारों ने सरकार और प्रशासन से मानवीय आधार पर गुहार लगाई है कि उन्हें इस तरह अचानक बेदखल न किया जाए। निवासियों का कहना है कि वे कानून और अदालत के आदेशों का पूरा सम्मान करते हैं, लेकिन कार्रवाई करने से पहले उन्हें उचित समय, लिखित नोटिस और सम्मानजनक ढंग से रहने के लिए वैकल्पिक जगह दी जानी चाहिए। लोगों की सबसे बड़ी चिंता बच्चों की शिक्षा, रोजगार का छिनना और जीवनभर की गाढ़ी कमाई डूबने को लेकर है। अब इस पूरे क्षेत्र की नजरें प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं कि क्या उन्हें राहत मिलती है या बेघर होना पड़ता है।

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