तबादला नीति पर उठे सवाल, जूनियर्स से लिखवाई जाएंगी सीनियर्स की CR
भोपाल। मध्य प्रदेश में हाल ही में हुए सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों के तबादलों के बाद कई प्रशासनिक विभागों में बड़ी अनियमितताएं और विसंगतियां सामने आ रही हैं। राज्य के कई महत्वपूर्ण विभागों में वरिष्ठ (सीनियर) अधिकारियों को दरकिनार कर कनिष्ठ (जूनियर) अधिकारियों को ऊंचे और मलाईदार पदों पर बैठा दिया गया है। इस वीटो पावर और पोस्टिंग के कारण अब जिलों में एक अजीब स्थिति पैदा हो गई है, जहाँ उच्च पदों पर काबिज ये जूनियर अधिकारी अपने से सीनियर अधिकारियों की गोपनीय रिपोर्ट (सीआर - चरित्र संपावली) लिखेंगे। इस व्यवस्था को लेकर प्रदेश के प्रशासनिक हलके और कर्मचारियों में भारी रोष और असंतोष देखा जा रहा है।
MSME और कृषि विभाग में वरिष्ठता की अनदेखी
कृषि विभाग में हुए विवाद के बाद अब सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) विभाग में भी वरिष्ठता की अनदेखी का एक बड़ा मामला उजागर हुआ है। एमएसएमई विभाग में निचले स्तर पर कार्यरत कई प्रभारी प्रबंधकों (प्रमोशन या प्रभार वाले अधिकारियों) को सीधे जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्रों का महाप्रबंधक (जीएम) बना दिया गया है। चौंकाने वाली बात यह है कि यह फैसला तब लिया गया जब विभाग के पास मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) द्वारा चयनित 2016, 2017 और 2019 बैच के 60 से अधिक योग्य वर्ग-2 (राजपत्रित) अधिकारी पहले से ही लाइन में मौजूद हैं।
एक ही कुर्सी पर दो-दो अफसरों की तैनाती
वाणिज्यिक कर विभाग और लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) में तो स्थानांतरण नीतियों और नियमों की सरेआम धज्जियां उड़ाई गई हैं। राजधानी भोपाल, इंदौर और ग्वालियर में कई स्थानों पर एक ही स्वीकृत पद के लिए दो-दो अधिकारियों की पोस्टिंग के आदेश जारी कर दिए गए हैं, जिससे विभागों में भारी असमंजस और 'कौन बॉस है' की लड़ाई छिड़ गई है। इसी तरह इंदौर में पदस्थ चीफ इंजीनियर योगेंद्र कुमार को उनके मूल पद से सीधे दो स्तर ऊपर का प्रभार सौंप दिया गया, जिस पर विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने पदानुक्रम (सीनियरिटी लिस्ट) के उल्लंघन की कड़ी कानूनी आपत्ति जताई है।
ग्रामीण विकास विभाग में भारी विरोध के बाद सुधरी गलती
इसी तरह का एक बड़ा घालमेल ग्रामीण विकास विभाग में भी देखने को मिला था, जहाँ 40 से अधिक योग्य और सीनियर अधिकारी उपलब्ध होने के बावजूद लगभग 33% पदों को नियम विरुद्ध तरीके से जूनियरों से भर दिया गया था। हालांकि, चौतरफा कड़े विरोध और न्यायालय जाने की चेतावनी के बाद विभाग को बैकफुट पर आना पड़ा और अपनी गलतियों में सुधार करना पड़ा:
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इंदौर संभाग: अतिरिक्त संचालक स्तर के अत्यंत वरिष्ठ अधिकारी दीतू सिंह राणदा को उनके मूल पद से नीचे 'संयुक्त आयुक्त' के पद पर डिमोट कर रख दिया गया था, जिसे अब सुधारा गया है।
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भोपाल: जनपद स्तर के सीईओ विनोद यादव को नियम विरुद्ध तरीके से रातोंरात पदोन्नत कर 'संयुक्त आयुक्त' का बड़ा प्रभार दे दिया गया था, जिस पर अब कैंसिलेशन की तलवार लटक रही है।
मध्य प्रदेश सिविल सेवा नियमों का खुला उल्लंघन
प्रशासनिक विशेषज्ञों और रिटायर्ड आईएएस अधिकारियों का साफ कहना है कि ट्रांसफर और प्रभार की यह पूरी प्रक्रिया 'मप्र सिविल सेवा नियम, 1961' के प्रावधानों के पूरी तरह खिलाफ है। नियमों के अनुसार, शासकीय प्रशासनिक व्यवस्था हमेशा 'पदानुक्रम' (Hierarchy) के सिद्धांत पर ही काम करती है। कोई भी कनिष्ठ (जूनियर) अधिकारी कभी भी अपने से वरिष्ठ (सीनियर) का 'नियंत्रण प्राधिकारी' या रिपोर्टिंग अथॉरिटी नहीं हो सकता।
किसी जूनियर को उच्च पद का प्रभार देकर उसे अपने सीनियर की वार्षिक सीआर (Confidential Report) लिखने का वैधानिक अधिकार देना 'सर्विस ज्यूरिसप्रूडेंस' (सेवा न्यायशास्त्र) के मूल सिद्धांतों के पूरी तरह विपरीत और असंवैधानिक है, जिससे शासकीय व्यवस्था चरमरा सकती है।

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