E-हाजिरी के विरोध में उतरे आउटसोर्स कर्मचारी, 7 दिन का अल्टीमेटम
साधना एक्सप्रेस रीवा, 24 जुलाई। म.प्र. पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए ई-उपस्थिति (E-Attendance) अनिवार्य किए जाने के विरोध में प्रदेशभर में आंदोलन शुरू हो गया है। शुक्रवार को विंध्य आउटसोर्स कर्मचारी संगठन के पदाधिकारियों ने अधीक्षण अभियंता कार्यालय, रीवा पहुंचकर ज्ञापन सौंपा और आदेश को भेदभावपूर्ण बताते हुए सात दिन के भीतर इसे वापस लेने की मांग की। संगठन ने चेतावनी दी है कि मांगें नहीं मानी गईं तो संभाग से लेकर प्रदेश स्तर तक आंदोलन तेज किया जाएगा।
संगठन के प्रदेश अध्यक्ष मुकेश पांडेय, प्रदेश सचिव सतीश चौबे एवं प्रदेश मीडिया प्रभारी आर्यन जायसवाल के नेतृत्व में कर्मचारियों ने ज्ञापन सौंपा। संगठन का कहना है कि 22 जुलाई 2026 से जारी आदेश के तहत अब आउटसोर्स कर्मचारियों की उपस्थिति केवल MPEZ E-Attendance मोबाइल ऐप के माध्यम से ही दर्ज की जाएगी। रजिस्टर के माध्यम से उपस्थिति दर्ज करने की व्यवस्था समाप्त कर दी गई है तथा अनुपालन न होने पर वेतन रोकने की चेतावनी भी दी गई है।
संगठन के अनुसार यह आदेश रीवा संभाग में कार्यरत विभिन्न आउटसोर्स एजेंसियों के कर्मचारियों पर लागू किया गया है, जिससे लाइनमैन, मीटर रीडर, कंप्यूटर ऑपरेटर एवं सुरक्षा गार्ड सहित बड़ी संख्या में कर्मचारी प्रभावित होंगे।

प्रदेश अध्यक्ष मुकेश पांडेय ने कहा कि यदि ई-उपस्थिति व्यवस्था लागू करनी है तो यह नियमित और आउटसोर्स दोनों प्रकार के कर्मचारियों पर समान रूप से लागू की जानी चाहिए। उनका कहना है कि केवल आउटसोर्स कर्मचारियों पर यह व्यवस्था लागू करना भेदभावपूर्ण है। उन्होंने यह भी कहा कि कम वेतन पाने वाले कर्मचारियों से स्मार्टफोन खरीदने और तकनीकी समस्याओं का भार उठाने की अपेक्षा उचित नहीं है।
प्रदेश सचिव सतीश चौबे ने बताया कि प्रदेश में बड़ी संख्या में आउटसोर्स कर्मचारी 10 से 12 हजार रुपये मासिक वेतन पर कार्य कर रहे हैं। ऐसे में सभी के लिए स्मार्टफोन खरीदना संभव नहीं है। उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में नेटवर्क की समस्या तथा ऐप की तकनीकी खामियों का भी उल्लेख करते हुए कहा कि इन कारणों से कर्मचारियों का वेतन प्रभावित नहीं होना चाहिए।
ज्ञापन में संगठन ने पांच प्रमुख मांगें रखी हैं। इनमें नियमित एवं आउटसोर्स कर्मचारियों पर समान नियम लागू करना, जिन कर्मचारियों के पास स्मार्टफोन नहीं है उन्हें विभाग द्वारा मोबाइल अथवा बायोमेट्रिक सुविधा उपलब्ध कराना, नेटवर्क या ऐप की समस्या होने पर मैनुअल उपस्थिति स्वीकार करना, अतिरिक्त कार्य के बदले ओवरटाइम एवं जोखिम भत्ता देना तथा मांगें पूरी होने तक वेतन कटौती नहीं करने की मांग शामिल है।
प्रदेश मीडिया प्रभारी आर्यन जायसवाल ने बताया कि रीवा के अलावा जबलपुर, सागर, शहडोल, सतना, सीधी और सिंगरौली सहित अन्य जिलों में भी आउटसोर्स कर्मचारी ज्ञापन सौंप रहे हैं। उन्होंने बताया कि 28 जुलाई को जबलपुर में प्रदेश स्तरीय बैठक आयोजित कर आगे की रणनीति तय की जाएगी।
इस संबंध में अधीक्षण अभियंता कार्यालय के अधिकारियों का कहना है कि ई-उपस्थिति संबंधी निर्देश मुख्यालय से प्राप्त हुए हैं। यह व्यवस्था पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लागू की गई है ताकि उपस्थिति प्रणाली में पारदर्शिता लाई जा सके। अधिकारियों ने कहा कि कर्मचारियों की ओर से उठाई गई समस्याओं को उच्च स्तर पर भेजा जाएगा।
संगठन ने ज्ञापन में सात दिन के भीतर सकारात्मक निर्णय लेने की मांग करते हुए स्पष्ट किया है कि यदि मांगों पर विचार नहीं किया गया तो व्यापक आंदोलन किया जाएगा, जिसकी जिम्मेदारी शासन एवं प्रबंधन की होगी।

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