रायपुर। कांग्रेस के शीर्ष नेता राहुल गांधी 21 जून को एक दिवसीय दौरे पर छत्तीसगढ़ के अभनपुर पहुंचे, जहां उन्होंने कांग्रेस पार्टी के 10 दिवसीय विशेष प्रशिक्षण शिविर में हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने करीब 40 मिनट तक प्रदेश के वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं के साथ बंद कमरे में अहम बैठक की। हालांकि, इस दौरे के बीच सबसे ज्यादा सुर्खियां रायपुर के स्वामी विवेकानंद एयरपोर्ट पर सरगुजा से नवनिर्वाचित भाजपा सांसद चिंतामणि महाराज और राहुल गांधी की अचानक हुई मुलाकात ने बटोरी हैं। इस अप्रत्याशित मुलाकात के बाद से ही प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में कयासों और सियासी चर्चाओं का बाजार बेहद गर्म हो गया है।

एयरपोर्ट के वीआईपी वेटिंग एरिया में साथ बैठे दिखे दोनों नेता, कयासों का दौर शुरू

ट्रेनिंग सत्र समाप्त होने के बाद जब राहुल गांधी वापस लौटने के लिए एयरपोर्ट पहुंचे, तो वहां वीआईपी वेटिंग एरिया में वे और भाजपा सांसद चिंतामणि महाराज एक साथ बैठे और बातचीत करते नजर आए। दोनों धुर विरोधी दलों के बड़े नेताओं की इस तरह हुई मुलाकात ने राजनीतिक विश्लेषकों को चौंका दिया है।

गौरतलब है कि चिंतामणि महाराज अतीत में लंबे समय तक कांग्रेस का हिस्सा रहे हैं और कांग्रेस के टिकट पर विधायक भी रह चुके हैं। विधानसभा चुनाव के वक्त टिकट कटने और अंदरूनी मतभेदों के बाद उन्होंने कांग्रेस को अलविदा कहकर भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया था और हाल ही में बीजेपी के टिकट पर सांसद चुने गए हैं। ऐसे में पुराने कांग्रेसी रहे चिंतामणि महाराज और राहुल गांधी की इस मुलाकात के अब अलग-अलग राजनीतिक मायने और कयास निकाले जा रहे हैं।

हसदेव और तमनार के मुद्दों पर कांग्रेस ने बनाई रणनीति, प्रभावितों से मिलेंगे नेता

इससे पहले, अभनपुर में आयोजित कांग्रेस के प्रशिक्षण शिविर में राहुल गांधी ने संगठन की मजबूती को लेकर नेताओं को कड़े मंत्र दिए। बैठक के बाद सूबे के पूर्व डिप्टी सीएम टीएस सिंहदेव ने मीडिया से चर्चा करते हुए बताया कि प्रदेश के मौजूदा राजनीतिक हालात, संगठन की स्थिति और विभिन्न जनहित के मुद्दों पर राहुल गांधी के साथ विस्तृत और सकारात्मक चर्चा हुई है।

सिंहदेव ने खुलासा किया कि बैठक में विशेष रूप से तमनार और हसदेव अंचल के जल-जंगल-जमीन से जुड़े संवेदनशील मुद्दों को लेकर कांग्रेस ने अपनी आगामी रणनीति तैयार की है। उन्होंने कहा कि इन क्षेत्रों के प्रभावित स्थानीय ग्रामीणों और आदिवासियों से कांग्रेस के बड़े नेता सीधे जमीन पर जाकर मुलाकात करेंगे, उनकी समस्याओं और मांगों को समझेंगे और फिर सरकार के खिलाफ एक बड़ा आंदोलन खड़ा किया जाएगा।

भाजपा का तीखा पलटवार: 'कांग्रेस को एकजुट करना राहुल के बस की बात नहीं'

दूसरी तरफ, कांग्रेस के इस बड़े प्रशिक्षण शिविर और राहुल गांधी के छत्तीसगढ़ दौरे को लेकर सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने बेहद तीखा और आक्रामक तंज कसा है। भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने तंज कसते हुए कहा कि राहुल गांधी की किसी भी तरह की 'ट्रेनिंग' का छत्तीसगढ़ कांग्रेस पर रत्ती भर भी असर पड़ने वाला नहीं है।

भाजपा ने बेहद कड़ा कटाक्ष करते हुए कहा कि राहुल गांधी यहां केवल अपनी पार्टी के भीतर "मेंढक तौलने" (बिखरे हुए नेताओं को जबरन एक करने) आए थे, लेकिन आपस में गुटबाजी से जूझ रही कांग्रेस को एकजुट करना अब उनके बस की बात नहीं रह गई है। बीजेपी प्रवक्ताओं ने दावा किया कि कांग्रेस के भीतर मची अंदरूनी खींचतान और सिरफुटव्वल कभी खत्म होने वाली नहीं है। उन्होंने तंज कसा कि आगामी ढाई वर्षों के भीतर होने वाले चुनावों में कांग्रेस को जमीनी स्तर पर खुद अपनी असली राजनीतिक हैसियत का अंदाजा हो जाएगा।