मध्य प्रदेश पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के अंतर्गत मानिकवार क्षेत्र में बिजली विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर किसानों में गहरा असंतोष है। किसानों ने आरोप लगाया है कि उनके घरेलू कनेक्शनों पर 15 से 20 हजार रुपये तक के मनमाने बिजली बिल भेजे जा रहे हैं, जो वास्तविक खपत से मेल नहीं खाते।
ग्रामीणों के अनुसार, बिल सुधार के लिए कई बार शिकायत करने के बावजूद विभागीय स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती। उल्टा बकाया राशि के नाम पर उपभोक्ताओं को नोटिस थमा दिए जाते हैं। किसानों का कहना है कि उन्हें लोक अदालत में बुलाकर समझौते के लिए दबाव भी बनाया जाता है।
बिजली आपूर्ति व्यवस्था भी सवालों के घेरे में है। क्षेत्र में आए दिन बिजली फॉल्ट की समस्या बनी रहती है, कई स्थानों पर ट्रांसफार्मर जले पड़े हैं, लेकिन समय पर सुधार कार्य नहीं हो रहा। किसानों ने यह भी आरोप लगाया कि विभागीय अधिकारी शिकायत के दौरान फोन तक नहीं उठाते, जिससे उनकी परेशानियां और बढ़ जाती हैं।
शिकायत तंत्र को लेकर भी गंभीर सवाल उठे हैं। किसानों का कहना है कि डायल 1912 और सीएम हेल्पलाइन 181 पर दर्ज शिकायतें भी कागजों में ही सीमित रह जाती हैं और मौके पर कोई कार्रवाई नहीं होती
किसानों का आरोप है कि विभाग का मुख्य उद्देश्य केवल बकाया वसूली रह गया है, जबकि मूलभूत सेवाओं की अनदेखी की जा रही है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की जाए तथा किसानों को राहत दी जाए।