वैश्विक दृष्टिकोण स्व देखें तो दुनिया की 60: से अधिक आबादी किसी न किसी प्रकार का रोजगार या काम कर रही जिसके लिए उसे अपना अधिकांश समय कार्यस्थल पर ही बिताना पड़ता हैं। अधिकांश युवाओं को तो सुबह से लेकर लगभग रात तक ही कार्यलयों में अपने जीवन का अनमोल समय देना पड़ता ऐसे में उस जगह उसे सुरक्षा और स्वास्थय सम्बन्धी अधिकार मिलना भी जरूरी है। ऐसे में कार्यस्थल पर होने वाली आकस्मिक दुर्घटनाओं और बीमारियों को रोने के लिए प्रतिवर्ष 28 अप्रैल को विश्व स्तर पर कार्यस्थल सुरक्षा और स्वास्थ्य दिवस मनाया जाता है। यह एक तरह से जागरूकता अभियान है जिसका उद्देश्य कार्यस्थलों पर एक सुरक्षित और स्वस्थ वातावरण का निर्माण करना है जिससे कार्यस्थल पर होने वाली दुर्घटनाओं और चोटों को कम किया जा सके। अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (आईएलओ) ने कार्यस्थल होने वाली दुर्घटनाओं और बीमारियों को कम करने पर जोर देने के लिए 2003 से इस दिन को मनाना शुरू किया। ट्रेड यूनियन आंदोलन द्वारा इस दिन को मृत और घायल श्रमिकों के अंतर्राष्ट्रीय स्मरण दिवस के रूप में भी मनाया जाता है। यह आयोजन एक तरह से अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन की व्यावसायिक स्तर पर कर्मचारियों को दी जाने वाली सुरक्षा और उनके स्वास्थ्य पर ध्यान केंद्रित करने वैश्विक योजनाओं का अभिन्न अंग है। 

इस दिन दुनिया भर में जनता और श्रमिकों के बीच सुरक्षित व स्वस्थ कार्य रणनीति बनाने तथा स्वास्थ्य और सुरक्षा के महत्व को बढ़ाने की आवश्यकता के बारे में जागरूकता पैदा करने का प्रयास किया जाता है। यदि हम सब गम्भीरता से विचार करें टॉनकार्यस्थल पर चोटों और मृत्यु को रोकने की जिम्मेदारी हम सभी की है जिसके लिए सरकार द्वारा निर्धारित मानक कानूनों और विनियमों का पालन करना सबके लिए ही बेहद जरूरी है। हर परिस्थिति में नियोक्ता का यह कर्तव्य है कि वह कार्यस्थल पर अपने कर्मचारियों को एक सकारात्मक और सुरक्षित कार्य वातावरण प्रदान करे। इसके अलावा श्रमिकों को भी अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए, अपने अधिकारों को जानना चाहिए और निवारक उपाय अपनाने चाहिए क्योंकि, थोड़ी-सी भी लापरवाही या अनभिज्ञता का भविष्य में खामियाजा भुगतना पड़ता है। हम सभी अपने जीवन का एक बड़ा हिस्सा अपने कार्यस्थलों पर बिताते हैं इसलिए यह जरूरी हो जाता है कि, हम कार्यस्थल पर स्वास्थ्य और सुरक्षा सम्बन्धी अपने मौलिक अधिकार के प्रति सजग, सतर्क और जागरूक रहें। व्यावसायिक स्वास्थ्य के अंतर्गत श्रमिकों की शारीरिक, मानसिक और सामाजिक सभी तरह की भलाई तो शामिल है ही इसके साथ ही कार्यस्थल से संबंधित खतरों की रोकथाम को भी इसके अंतर्गत रखा गया है। कार्यस्थल पर संभावित खतरों के कारण व्यावसायिक बीमारियाँ उत्पन्न हो सकती हैं जो श्रमिकों की कार्यदक्षता में भागीदारी को कम करती और भविष्य में होने वाली बीमारियों की संभावनाओं में वृद्धि का कारण बनती हैं। 

एक सर्वे के अनुसार प्रतिदिन, व्यावसायिक दुर्घटनाओं या कार्य-संबंधी बीमारियों के परिणामस्वरूप 6,300 लोगों की मृत्यु होती है और प्रति वर्ष 23 लाख से अधिक मौतें होती हैं। प्रतिवर्ष कार्यस्थल पर 3.7 करोड़ दुर्घटनाएँ होती हैं जिनमें से कई दुर्घटनाओं के कारण कर्मचारियों को लंबे समय तक काम से अनुपस्थित रहना पड़ता है। अतः कार्यस्थल पर सुरक्षा एवं स्वास्थ्य के लिए विश्व दिवस की स्थापना अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन द्वारा वर्ष 2003 में कार्यस्थल सुरक्षा और स्वस्थ कार्य वातावरण को बढ़ावा देने के लिए की गई थी। इस तरह अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (आईएलओ) प्रत्येक वर्ष 28 अप्रैल को कार्यस्थल पर सुरक्षा और स्वास्थ्य के लिए विश्व दिवस मनाता है।  हर वर्ष इस दिन के लिए कोई विशेष थीम चुनी जाती है और इस बार 2026 का विषय है - सुरक्षा बढ़ाने के लिए लोगों को शामिल करना, शिक्षित करना और सशक्त बनाना। 2026 के लिए लक्षित उद्देश्य दुर्घटनाओं को कम करना और संगठित एवं असंगठित दोनों क्षेत्रों में सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं पर्यावरण संबंधी प्रथाओं को सुदृढ़ करना है। यदि सभी लोग एकजुट होकर संकल्पित हो तो किसी भी लक्ष्य को  प्राप्त करना मुश्किल नहीं इसलिए सभी मिलकर 28 अप्रैल को मनाए जाने वाले कार्यस्थल पर सुरक्षा एवं स्वास्थ्य के लिए विश्व दिवस का अधिक से अधिक प्रचार-प्रसार करें।

-सुश्री इंदु सिंह 'इंदुश्री'
स्वतंत्र लेखिका व इंटरनेशनल योग मास्टर
नरसिंहपुर (मप्र)