FPI पर सख्ती: भारत ने मॉरीशस आधारित निवेशकों को भेजे नोटिस
आयकर विभाग ने भारत-मॉरीशस संधि के तहत कर लाभ का दावा करने वाले मॉरीशस के विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) की जांच-पड़ताल तेज कर दी है। सूत्रों के अनुसार पिछले दो हफ्ते के दौरान मॉरीशस के आधा दर्जन से अधिक एफपीआई को उनके कर निवास प्रमाण पत्र (टीआरसी) के संबंध में आयकर विभाग से नोटिस मिले हैं।
घटनाक्रम के जानकार एक सूत्र ने कहा, ‘कर विभाग ने टीआरसी आवेदन की प्रतियां देने का अनुरोध किया है। कुछ एफपीआई प्रशासकों ने मॉरीशस में स्थायी व्यवसाय स्थान घोषित नहीं किया है, ऐसे में उन्हें कर लाभ देने से मना किया जा सकता है। 5 से 7 एफपीआई को डेरिवेटिव आय पर कर वसूली का नोटिस मिला है।’
पिछले साल सर्वोच्च न्यायालय ने टीआरसी पर दिल्ली उच्च न्यायालय के उस फैसले पर रोक लगा दी थी, जिसमें विदेशी निवेशकों के लिए कम कर दरों का समर्थन किया गया था। ब्लैकस्टोन कैपिटल पार्टनर्स से जुड़े इस मामले में अंतिम सुनवाई लंबित है।
कानून के जानकारों का कहना है कि दोहरा कराधान निषेध संधि (डीटीएए) और आयकर अधिनियम के अनुसार टीआरसी संधि साझेदार देश में करदाता के निवास की पुष्टि करता है मगर इसे संधि लाभों के लिए व्यापक अधिकार के रूप में नहीं माना जा सकता है। सिंघानिया ऐंड कंपनी में पार्टनर कुणाल शर्मा ने कहा, ‘टीआरसी के साथ-साथ, इसे संधि की अन्य शर्तों को भी पूरा करना चाहिए जैसे कि लाभ की सीमा (एलओबी) या मुख्य उद्देश्य परीक्षण (पीपीटी) प्रावधान जिनका उद्देश्य संधि के दुरुपयोग को रोकना है। कर अधिकारी इस बात के सबूत मांग रहे हैं कि संधि लाभों का दावा करने वाली इकाई वास्तविक व्यवसाय संचालित करती है और वह माध्यम नहीं है।’
कई कर विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय न्यायालयों ने टीआरसी को करदाता की आवास स्थिति के निर्णायक सबूत के रूप में मान्यता दी है और इस प्रकार वे लाभ का दावा करने के लिए पात्र हैं।
चार्टर्ड अकाउंटेंट फर्म सीएनके के पार्टनर पल्लव प्रद्युम्न नारंग ने कहा, ‘कभी-कभी व्यावहारिक कठिनाइयां हो सकती हैं, जिसमें कर विभाग द्वारा विभिन्न प्रारूपों और/या पूरे विवरण की कमी के कारण आपत्ति उठाई जा सकती हैं। हालांकि ये संधि लाभ से इनकार करने का आधार नहीं हो सकता है।’
ध्रुव एडवाइजर्स में पार्टनर पुनीत शाह ने कहा, ‘कर अधिकारी विनियामक फाइलिंग, लाभकारी स्वामित्व घोषणा और बोर्ड गतिविधियों सहित एफपीआई की पृष्ठभूमि की बारीकी से जांच कर रहे हैं, खास तौर पर मॉरीशस और सिंगापुर के एफपीआई की।’
विशेषज्ञों ने आगाह किया कि जांच से मुकदमेबाजी के मामले बढ़ सकते हैं। नैशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी (एनएसडीएल) के आंकड़ों के अनुसार 3.57 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति के साथ मॉरीशस एफपीआई निवेश के मामले में पांचवें स्थान पर है।

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