बिना निर्माण छोड़े गए प्लॉट पर कार्रवाई, फरीदाबाद प्रशासन सख्त
फरीदाबाद|फरीदाबाद में प्लॉटधारकों के लिए सरकार ने नई गाइडलाइन जारी कर दी है। इसके तहत लंबे समय तक प्लॉट पर निर्माण कार्य शुरू न करने या अधूरा छोड़ने पर अब भारी शुल्क (एक्सटेंशन फीस) देनी होगी। इस फैसले से न सिर्फ अनियमित निर्माण पर रोक लगेगी, बल्कि नियोजित विकास को भी गति मिलेगी।नई व्यवस्था लागू होने के बाद बिल्डरों और आम प्लॉटधारकों दोनों पर दबाव बढ़ेगा कि वे तय समयसीमा के भीतर निर्माण पूरा करें। स्मार्ट सिटी में बड़ी संख्या में ऐसे प्लॉट हैं, जिन पर वर्षों से निर्माण नहीं हुआ है या आधा-अधूरा ढांचा खड़ा कर छोड़ दिया गया है। इससे न केवल क्षेत्र की सुंदरता प्रभावित होती है, बल्कि सुरक्षा और स्वच्छता से जुड़ी समस्याएं भी पैदा होती हैं। साथ ही योजनाबद्ध विकास प्रभावित हो रहा है।कई जगह नियमों के विरुद्ध बेसमेंट और अतिरिक्त मंजिलों का निर्माण किया गया है, जिस कारण कंप्लीशन सर्टिफिकेट जारी नहीं हो पा रहे, जिससे न केवल नगर निगम को राजस्व नुकसान हो रहा है, बल्कि बुनियादी सुविधाओं की योजनाओं पर भी असर पड़ रहा है। नियमों का उल्लंघन करने वालों को कंप्लीशन सर्टिफिकेट भी नहीं मिलेगा।
दो श्रेणियों में तय की गई एक्सटेंशन फीस
जहां भवन बना है लेकिन कंप्लीशन सर्टिफिकेट नहीं लिया गया। नगर निगम क्षेत्र में आने वाले इस तरह के मामलों में प्रति वर्ग मीटर प्रति वर्ष 30 रुपये एक्सटेंशन फीस लगेगी। उदाहरण के तौर पर, यदि 200 वर्ग मीटर का प्लॉट 1990 में आवंटित हुआ और 2025 में सेल डीड के लिए आवेदन किया गया, तो 35 वर्षों के हिसाब से करीब 2.10 लाख रुपये तक शुल्क लिया जाएगा।यह समाज के खिलाफ अपराध, फरीदाबाद नगर निगम के अधिकारियों को अग्रिम जमानत नहींये भी पढ़ें:गुरुग्राम-फरीदाबाद रोड पर जाम से मिलेगी राहत, जल्द बनेगी नई स्लिप रोड
जमीन की जमाखोरी करने वालों पर रोक लगेगी
रियल एस्टेट विशेषज्ञ का कहना है कि इस कदम से जमीन की जमाखोरी पर भी रोक लगेगी। लोग अब प्लॉट खरीदकर लंबे समय तक खाली नहीं रख सकेंगे, बल्कि समय पर निर्माण कर उपयोग में लाना होगा। इससे आवासीय और व्यावसायिक दोनों क्षेत्रों में गतिविधियां बढ़ेंगी और रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे। हालांकि,कुछ प्लॉटधारकों ने इस फैसले पर नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि आर्थिक या पारिवारिक कारणों से कई बार निर्माण में देरी हो जाती है।
दरें अलग-अलग रहेंगी
यूएलबी के आदेशों के अनुसार, योजना के तहत आवंटित प्लॉटों पर बिल्डिंग प्लान की वैधता बढ़ाने के लिए अलग-अलग दरों पर शुल्क तय किया है। यह शुल्क आवंटन की तिथि से लेकर सेल डीड के लिए आवेदन करने की तिथि तक वसूला जाएगा।
शुल्क चुकाना अनिवार्य
नगर निगम क्षेत्र में प्रति वर्ग मीटर प्रति वर्ष 60 रुपये की दर से फीस ली जाएगी। यानी 200 वर्ग मीटर के प्लॉट पर 35 वर्षों तक निर्माण न होने की स्थिति में करीब 4.20 लाख रुपये तक एक्सटेंशन फीस चुकानी पड़ सकती है। इसे चुकाना अनिवार्य होगा।


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