दिल्ली देश| के प्रतिष्ठित विश्विद्यालय गुरुग्राम यूनिवर्सिटी में  12 फरवरी  को भारतीय ज्ञान परंपरा और भगवद्गीता पर आधारित कर्मयोग की व्याख्या विषय पर एक अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया गया।जिसमें देश विदेश के विद्वानों ने भाग लिया।प्रसिद्ध पत्रकार और लेखिका डॉ दर्शनी प्रिय को भी इसमें विशेष अतिथि और व्याख्यानकर्ता के रूप में आमंत्रित किया गया था।भारतीय ज्ञान परंपरा: कर्म योग, ज्ञान योग और भक्ति योग पर एक बहुत ही सुंदर वाचन विद्वानों द्वारा किया गया। इस कार्यक्रम में डॉ दर्शनी प्रिय ने कर्म योग और समकालीन समय में इसकी महत्ता पर वाचन किया। वे छात्रों को संबोधित करते हुए ज्ञान योग  भी बोली।भारत जैसे विशाल देश में जहां ज्ञान, योग और भक्ति की त्रिवेणी को मानवीय जीवन का सार और सर्वोत्तम उपलब्धियां में से एक माना जाता है, वैसे विषय पर अपने विचार रखने और छात्रों को संबोधित करने का अवसर निश्चित ही आह्लादित करने वाला था। वे खुद को सौभाग्यशाली मानती है कि श्रीमद्भागवतगीता और ज्ञान भारतीय ज्ञान परंपरा जैसे विषय पर भाव बोध के साथ अपनी बात रखने का सौभाग्य मिला। 

शुक्रगुजार हूं डॉक्टर अशोक खन्ना का जिन्होंने बड़े ही भाव प्रणव रूप में मुझे इस कार्यक्रम से जुड़ने का अवसर दिया

डायस पर विद्वानों में शामिल थे: 

प्रोफेसर संजय कुमार झा, डायरेक्ट, लिबरल आर्ट्स, अमेठी यूनिवर्सिटी, हरियाणा डॉ प्रोफ़ेसर सुनील सोढ़ी,सीनियर फेलो,IGNCI एंड रिटायर्ड प्रोफेसर, पॉलिटिकल साइंस,दिल्ली यूनिवर्सिटी डॉ नतालिया, रूसी विद्वान, मॉस्को यूनिवर्सिटी