दिल्ली का दर्द: ढही इमारत, टूटे करियर और जीवन
नई दिल्ली। दक्षिण दिल्ली के सैदुल्लाजाब इलाके में शनिवार रात एक सात मंजिला अवैध इमारत ताश के पत्तों की तरह ढह गई। इस दर्दनाक हादसे के मलबे में सिर्फ कंक्रीट, ईंट और सीमेंट नहीं दबे, बल्कि देश के कोने-कोने से आए उन होनहार युवाओं के सपने भी हमेशा के लिए दफन हो गए, जो अपनी आंखों में एक बेहतर भविष्य की उम्मीदें लेकर दिल्ली पहुंचे थे। छोटे शहरों और गांवों से आए इन युवाओं के परिवारों ने वर्षों की मेहनत, त्याग और कर्ज के सहारे उन्हें पढ़ाया था, लेकिन इस एक हादसे ने कई हंसते-खेलते परिवारों की दुनिया उजाड़ दी।
इंटरव्यू की खुशी के बाद वैज्ञानिक बनने का सपना टूटा
हादसे का सबसे दर्दनाक पहलू कपिल की कहानी है, जिनके लिए शनिवार का दिन उनके जीवन का सबसे बड़ा और खुशनुमा दिन था। वर्षों की कड़ी तपस्या के बाद कपिल 'भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र' (BARC) में वैज्ञानिक पद के लिए अपना इंटरव्यू देकर लौटे थे। इंटरव्यू बेहतरीन रहने की खुशी में उन्होंने शाम को दोस्तों को एक कैंटीन में पार्टी दी थी। सभी दोस्त बैठकर आगे के सुनहरे भविष्य की योजनाएं बना रहे थे, तभी अचानक इमारत भरभराकर गिर गई। मलबे में दबने से कपिल की मौत हो गई, जबकि उनके पांच दोस्त सुरक्षित बच निकले।
अफसर बनने से पहले ही थम गया नलिन का सफर
बिहार के नवादा जिले के रहने वाले नलिन इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद भारतीय रेलवे में अधिकारी बनने का सपना लेकर दिल्ली आए थे। परिवार के सबसे छोटे और लाडले नलिन का संकल्प था कि नौकरी लगते ही वह सबसे पहले अपने माता-पिता के लिए एक पक्का मकान बनवाएंगे। हादसे से चंद मिनट पहले ही वे कैंटीन में पराठा खाने बैठे थे। उनका दोस्त जैसे ही दही लेने बाहर निकला, एक जोरदार धमाका हुआ और पूरी इमारत मलबे के ढेर में तब्दील हो गई। रविवार सुबह जब नलिन का शव बाहर निकाला गया, तो उनके बूढ़े माता-पिता की सारी उम्मीदें भी टूट गईं।
खेत बेचकर बेटी को बनाया डॉक्टर, पर किस्मत ने सब छीना
राजस्थान के अलवर की रहने वाली मेधावी छात्रा एकता का डॉक्टर बनने का सपना पूरा करने के लिए उनके पिता रमेश ने अपनी जमीन तक बेच दी थी। आर्थिक तंगी के बावजूद परिवार ने कर्ज लेकर एकता को एमबीबीएस की पढ़ाई के लिए किर्गिस्तान भेजा था। वर्षों के कड़े संघर्ष के बाद एकता डॉक्टर बनकर भारत लौटी थीं। परिवार को लगा था कि अब उनके दुख के दिन खत्म हो गए हैं, लेकिन आगे की प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए दिल्ली आईं एकता की जिंदगी को इस हादसे ने लील लिया और एक पिता का सालों का त्याग मलबे में मिल गया।
परीक्षा से पहले ही बुझ गया रवि के घर का चिराग
उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले के निवासी 26 वर्षीय रवि भी इसी इमारत की भेंट चढ़ गए। किर्गिस्तान से एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी करने के बाद रवि 28 जून को होने वाली एफएमजीई (FMGE) परीक्षा की तैयारी में जुटे थे। एक साधारण किसान परिवार से ताल्लुक रखने वाले रवि की पढ़ाई के लिए माता-पिता ने 30 लाख रुपये का कर्ज लिया था। रवि अक्सर देर रात तक जागकर पढ़ता था ताकि परीक्षा पास कर अपने परिवार का कर्ज उतार सके। लेकिन परीक्षा के आयोजन से पहले ही इस हादसे ने रवि की जान ले ली और परिवार को कभी न भूलने वाला जख्म दे दिया।

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