चीन की छवि पर चोट, इन्फ्लुएंसर्स से बोला- हमारी इज्जत बचाओ
नई दिल्ली: सोशल मीडिया पर इन दिनों चीन की अंदरूनी सच्चाई को लेकर एक बड़ा डिजिटल युद्ध छिड़ गया है। भारतीय यूज़र्स द्वारा चीन की गरीबी, गंदगी, झुग्गियों, सामाजिक असमानता और वहां की छिपी हुई जाति व्यवस्था को उजागर करने के बाद अब ताइवान के लोग भी इस मुहिम में शामिल हो गए हैं। भारतीय इंटरनेट यूज़र्स ने दुनिया को दिखाया कि चीन का समाज भी ऐतिहासिक और सामाजिक रूप से चार श्रेणियों में बंटा हुआ है—शी (विद्वान और अधिकारी), नोंग (किसान), गोंग (कारीगर और शिल्पकार), और शोंग (व्यापारी)। इसके अलावा, चीन में लागू 'हुकोऊ' (Hukou) सिस्टम के जरिए नागरिकों के साथ होने वाले बड़े भेदभाव को भी बेनकाब किया गया है। यह एक सरकारी रजिस्ट्रेशन व्यवस्था है जो तय करती है कि किस नागरिक को शहर में रहने की इजाजत और सरकारी सुविधाएं मिलेंगी या नहीं।
चीनी प्रोपेगैंडा बनाम भारतीय संस्कृति की वैश्विक साख
चीन पिछले कई दशकों से भारी-भरकम फंड के जरिए दुनिया भर के इंफ्लुएंसर्स का इस्तेमाल करके भारतीय संस्कृति और सनातन परंपराओं को नीचा दिखाने का प्रयास करता रहा है। लेकिन इस दुष्प्रचार के बीच भारतीय संस्कृति की वास्तविक ताकत को रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के मार्गदर्शक और दार्शनिक अलेक्जेंडर डुगिन ने दुनिया के सामने रखा। डुगिन ने स्पष्ट कहा था कि भारतीय संस्कृति पश्चिमी देशों की तरह केवल भौतिकवाद, मुनाफे या चकाचौंध पर आधारित नहीं है, बल्कि इसकी जड़ें बेहद गहरी और आध्यात्मिक हैं। इसी सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और जागरूकता के दम पर आज भारत के आम नागरिकों ने चीन के नैरेटिव को कड़ी चुनौती दी है।
हुकोऊ सिस्टम का सच और चीन की बौखलाहट
चीन का 'हुकोऊ' सिस्टम वहां के ग्रामीण और शहरी समाज के बीच एक बहुत बड़ी खाई पैदा करता है। इस व्यवस्था के कारण करोड़ों ग्रामीण मजदूर रोजगार की तलाश में शहरों में तो आ जाते हैं, लेकिन उन्हें वहां के स्थायी निवासियों की तरह स्वास्थ्य, शिक्षा, आवास और सामाजिक सुरक्षा जैसी बुनियादी सुविधाएं नहीं मिलतीं। जैसे ही सोशल मीडिया पर इस कड़वे सच को उजागर किया गया, चीनी सरकारी मीडिया और वहां की पीआर मशीनरी इसे झूठ साबित करने में जुट गई। मुट्ठी भर भारतीय यूज़र्स द्वारा चलाए गए इस कैंपेन से बीजिंग में इतनी खलबली मची कि अब ताइवान के लोगों ने भी भारत का साथ देते हुए चीन की गरीबी और असमानता से जुड़े वीडियो इंटरनेट पर शेयर करने शुरू कर दिए हैं।
एक जीबी डेटा से अरबों डॉलर का पीआर साम्राज्य ध्वस्त
चीन भारत के खिलाफ 'इन्फॉर्मेशन वॉर' (सूचना युद्ध) और अपनी झूठी चमक-दमक दिखाने के लिए हर साल अरबों रुपये पानी की तरह बहाता है। मगर भारत के आम लोगों ने महज अपने मोबाइल डेटा की ताकत से चीन के इस पूरे प्रोपेगैंडा तंत्र को ध्वस्त कर दिया है। इस अप्रत्याशित डिजिटल हमले से बौखलाकर चीन ने अब भारत और पाकिस्तान के कुछ चुनिंदा सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर्स और समीक्षकों को अपनी छवि सुधारने के काम पर लगाया है। यही वजह है कि अचानक सोशल मीडिया पर कुछ लोग चीन के खान-पान, वहां के इंफ्रास्ट्रक्चर और ईमानदारी की तारीफों के पुल बांधते नजर आ रहे हैं, जबकि कुछ पत्रकार इस हुकोऊ सिस्टम का भ्रामक 'फैक्ट चेक' कर चीन में असमानता न होने का दावा कर रहे हैं।

राशिफल 05 जुलाई 2026: जानिए आज का दिन आपके लिए कैसा रहेगा
जश्न में फायरिंग पड़ी भारी, बिहार में BJP विधायक को कोर्ट ने सुनाई सजा
गुजरात में पीएम मोदी बोले- सेमीकंडक्टर सेक्टर में दुनिया का भरोसा जीत रहा भारत
चंदौसी: शिक्षिका की मौत के बाद वकील पर FIR, सुसाइड नोट बना अहम सबूत
जनता को जल्द इंसाफ दिलाने की दिशा में बिहार सरकार का अहम निर्णय
जमीन विवाद में गर्भवती महिला पर हमले से दो अजन्मे बच्चों की मौत, इलाके में आक्रोश