महुआ मोइत्रा का सरकार पर हमला, बोलीं- आपकी जान की परवाह नहीं
नई दिल्ली। प्रख्यात शिक्षाविद और पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक का जंतर-मंतर पर जारी अनिश्चितकालीन अनशन बेहद नाजुक मोड़ पर पहुंच गया है। पिछले 17 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे वांगचुक के स्वास्थ्य को लेकर गंभीर चिंताएं जताई जा रही हैं। वहां चल रहे एक अन्य प्रदर्शन 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने उनके स्वास्थ्य की ताजा जानकारी साझा करते हुए बताया है कि लंबे समय से अन्न का त्याग करने के कारण वांगचुक की मांसपेशियां अत्यधिक कमजोर हो चुकी हैं और वे तीव्र शारीरिक दर्द का सामना कर रहे हैं।
तेजी से घट रहा वजन, अनशन तोड़ने से किया इनकार
सोशल मीडिया के माध्यम से दी गई जानकारी के अनुसार, भूख हड़ताल के चलते सोनम वांगचुक का वजन अब तक लगभग 8.5 किलोग्राम कम हो चुका है, जबकि उनका रक्तचाप (ब्लड प्रेशर) 109/70 बना हुआ है। बिगड़ते स्वास्थ्य को देखते हुए विभिन्न सामाजिक कार्यकर्ताओं और सहयोगियों ने उनसे अपना अनशन समाप्त करने का बार-बार आग्रह किया है। हालांकि, उन्होंने शांत स्वभाव से इस अपील को ठुकराते हुए कहा कि आंदोलन को समाप्त करने के बजाय सरकार से यह सवाल पूछा जाना चाहिए कि वह बातचीत की प्रक्रिया को आगे क्यों नहीं बढ़ा रही है। प्रदर्शनकारियों ने शासन से इस संवेदनशील मुद्दे को अहंकार की लड़ाई न बनाने और मानवीय जीवन की रक्षा करने की अपील की है।
महुआ मोइत्रा समेत कई दिग्गज विपक्षी नेताओं का मिला समर्थन
सोनम वांगचुक के इस आंदोलन को राजनीतिक और सामाजिक हलकों से व्यापक समर्थन मिल रहा है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) की सांसद महुआ मोइत्रा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर वांगचुक के प्रति एकजुटता प्रकट करते हुए उनसे स्वास्थ्य कारणों से अनशन वापस लेने और न्याय की लड़ाई को अन्य तरीकों से जारी रखने की गुजारिश की है। इसके अतिरिक्त, शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे, माकपा सांसद अमराराम और दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री आतिशी सहित कई प्रमुख नेताओं ने भी इस सत्याग्रह का पुरजोर समर्थन किया है और आंदोलनकारियों की सुरक्षा व मांगों के प्रति चिंता व्यक्त की है।

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