वारी यात्रा में मातम, ट्रक हादसे में 3 महिला श्रद्धालुओं की गई जान
पुणे: महाराष्ट्र के पुणे जिले से एक बेहद दुखद खबर सामने आ रही है। पंढरपुर में आयोजित होने वाली आषाढ़ी वारी के लिए पैदल जा रहे श्रद्धालुओं (वारकरियों) के साथ सोमवार को सासवड-जेजुरी रोड पर एक भीषण सड़क दुर्घटना हो गई। तीर्थयात्रियों के एक समूह को पीछे से आ रहे एक अनियंत्रित ट्रक ने जोरदार टक्कर मार दी। इस दर्दनाक हादसे में तीन महिला वारकरियों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि चार अन्य श्रद्धालु गंभीर रूप से घायल हो गए। पुणे ग्रामीण पुलिस के अनुसार, यह हादसा सासवड-जेजुरी मार्ग पर स्थित बेलसर टोल नाके से जेजुरी की ओर करीब 500 मीटर की दूरी पर, होटल शिवदीप लॉजिंग के पास पेश आया।
दो अलग-अलग 'दिंडी' के बीच हुआ हादसा
पुलिस प्रशासन से मिली जानकारी के मुताबिक, दुर्घटना को अंजाम देने वाला ट्रक नांदेड़ जिले के लोहा तालुका की 'रंगनाथ महाराज पोखर्बीसीकर दिंडी' (श्रद्धालुओं का समूह) में शामिल था। इस बेकाबू ट्रक ने सांगली जिले के कसबे डिग्रज की 'दिंडी' में पैदल चल रही सात महिला वारकरियों को पीछे से अपनी चपेट में ले लिया। टक्कर इतनी भीषण थी कि तीन महिलाओं ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। हादसे के बाद घटना स्थल पर चीख-पुकार मच गई। स्थानीय निवासियों और पुलिसकर्मियों ने तुरंत बचाव कार्य शुरू करते हुए चारों घायल महिलाओं को जेजुरी के एक नजदीकी अस्पताल के आईसीयू (ICU) में भर्ती कराया, जहां उनकी हालत नाजुक बनी हुई है।
70 साल का बुजुर्ग ड्राइवर पुलिस हिरासत में
पुणे ग्रामीण पुलिस ने बताया कि दुर्घटनाग्रस्त ट्रक को चलाने वाले चालक की उम्र 70 वर्ष है। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी बुजुर्ग ड्राइवर को हिरासत में ले लिया है। हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस का आला अमला मौके पर पहुंच गया और शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजकर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है। पुलिस अब इस बिंदु पर तफ्तीश कर रही है कि यह हादसा ड्राइवर को नींद की झपकी आने के कारण हुआ या फिर ट्रक में कोई अचानक तकनीकी खराबी आ गई थी।
शोक में डूबी सदियों पुरानी आषाढ़ी वारी यात्रा
महाराष्ट्र की समृद्ध वैष्णव धार्मिक परंपरा (वारकरी पंथ) में वारी यात्रा का एक अत्यंत महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक स्थान है। 'आषाढ़ी वारी' दरअसल 21 दिनों की एक बेहद पवित्र पैदल तीर्थयात्रा होती है, जिसमें पूरे महाराष्ट्र के कोने-कोने से लाखों श्रद्धालु भजन-कीर्तन करते हुए पैदल चलकर भगवान विट्ठल के दर्शन के लिए पंढरपुर पहुंचते हैं। इस यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं के जो छोटे-छोटे जत्थे चलते हैं, उन्हें 'दिंडी' कहा जाता है। इस पावन आध्यात्मिक सफर के बीच हुए इस भयावह हादसे से साथी वारकरियों और पूरे प्रभावित इलाके में शोक की लहर दौड़ गई है।

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