जशपुर| अपनी नैसर्गिक सुंदरता और मनोरम वादियों के लिए पूरे देश में विख्यात छत्तीसगढ़ का जशपुर जिला अब चाय उत्पादन के क्षेत्र में एक नया इतिहास रचने की ओर अग्रसर है। जशपुर के सारुडीह में स्थित खूबसूरत चाय बागानों में इन दिनों 'हर्बल ब्लैक टी ऑर्थोडॉक्स' नाम की एक बेहद खास और नई किस्म पर काम किया जा रहा है। अपने बेमिसाल स्वाद के साथ-साथ यह चाय स्वास्थ्य के लिए भी अत्यंत गुणकारी मानी जा रही है। शुरुआती परीक्षणों में मिली सफलता के बाद अब इसका बड़े पैमाने पर कमर्शियल प्रोडक्शन (व्यावसायिक उत्पादन) शुरू करने की तैयारी की जा रही है।

स्वाद के साथ मिलेंगे बेहतरीन औषधीय गुण

सारुडीह चाय बागान में विशेष रूप से तैयार की जा रही यह हर्बल ब्लैक टी ऑर्थोडॉक्स इन दिनों अपनी खासियतों के चलते विशेषज्ञों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है। फिलहाल इसे प्रायोगिक तौर पर बेहद सावधानी से तैयार किया जा रहा है। बागान से चाय की बेहद कोमल और ताजी पत्तियों को चुनने के बाद उन्हें पारंपरिक रूप से हाथों से मसला जाता है और फिर आधुनिक मशीनों के जरिए प्रोसेस किया जाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, इस विशिष्ट चाय का नियमित सेवन वजन को नियंत्रित रखने, शरीर में कोलेस्ट्रॉल के स्तर को घटाने और त्वचा में प्राकृतिक निखार बनाए रखने में काफी मददगार साबित हो सकता है।

पर्यटकों के लिए पसंदीदा केंद्र बना सारुडीह

सारुडीह का यह हरा-भरा क्षेत्र अब सिर्फ चाय उगाने तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह एक बड़े टूरिस्ट स्पॉट के रूप में भी उभर रहा है। यहाँ छत्तीसगढ़ के अलावा पड़ोसी राज्यों जैसे झारखंड और ओडिशा से भी हर रोज सैकड़ों की तादाद में सैलानी पहुंच रहे हैं। चारों तरफ फैली मखमली हरियाली के बीच लोग प्रकृति का आनंद लेते हैं और साथ ही यहाँ की विशेष चाय की मेकिंग प्रोसेस को करीब से समझते हैं। बागान प्रबंधन से जुड़े कर्मियों के मुताबिक, यहाँ पिछले कई वर्षों से पूरी तरह वैज्ञानिक और जैविक पद्धति से चाय की खेती की जा रही है। समय पर सही ढंग से पत्तियों की तुड़ाई और उत्कृष्ट रिफाइनिंग की वजह से यहाँ की चाय का स्तर लगातार सुधर रहा है। अभी तक यहाँ मुख्य रूप से चार प्रकार की चाय का उत्पादन होता था, जिसमें अब यह नई हर्बल ब्लैक टी एक बड़ा नाम बनने जा रही है।

असम और दार्जिलिंग को टक्कर देगा जशपुर

स्थानीय निवासियों का कहना है कि एक समय था जब चाय के बागानों का जिक्र होते ही लोगों के जेहन में सिर्फ असम या दार्जिलिंग का नाम आता था, मगर अब जशपुर अपनी बेहतरीन भौगोलिक स्थिति और लाजवाब क्वालिटी के दम पर इस धारणा को बदल रहा है। यदि हर्बल ब्लैक टी ऑर्थोडॉक्स का यह अभिनव प्रयोग पूरी तरह बाजार में सफल रहता है, तो इससे न केवल जशपुर की चाय को राष्ट्रीय स्तर पर एक नई पहचान मिलेगी, बल्कि इस वनांचल क्षेत्र के स्थानीय युवाओं और ग्रामीणों के लिए रोजगार के ढेरों नए अवसर भी पैदा होंगे। यह नई शुरुआत स्वाद, सेहत और तरक्की की एक नई किरण लेकर आई है।