हार्ट और लंग्स को रखना है फिट? अपनाएं सिर्फ 2 मिनट की यह आसान आदत
इंसानी शरीर को भीतर से निरोगी और साफ रखने के लिए अक्सर लोग 'बॉडी डिटॉक्स' या खान-पान में बदलाव के तरीकों को अपनाते हैं। मगर क्या आप जानते हैं कि पूरे शरीर को स्वस्थ रखने की पहली सीढ़ी हमारे मुंह (ओरल कैविटी) की संपूर्ण साफ-सफाई से होकर गुजरती है? आमतौर पर लोग अपने दांतों को केवल सफेदी और चमक देने के लिए सुबह-सुबह ब्रश तो कर लेते हैं, लेकिन जीभ, मसूड़ों और मुंह के अंदरूनी हिस्सों की पूरी सफाई को नजरअंदाज कर देते हैं। हमारे ओरल कैविटी में हर समय करोड़ों की संख्या में सूक्ष्म बैक्टीरिया मौजूद रहते हैं। नियमित और सही सफाई न होने पर यही बैक्टीरिया दांतों की जड़ों और मसूड़ों के ऊपर 'प्लाक' और 'टार्टर' (पीली सख्त परत) जमाना शुरू कर देते हैं। इसके परिणामस्वरूप मसूड़ों में दर्दनाक सूजन, सांसों की बदबू, पायरिया, खून आना और असमय दांतों का हिलना व कमजोर होना जैसी दिक्कतें पैदा हो जाती हैं।
चिकित्सा जगत के नवीनतम शोध और वैज्ञानिक अध्ययन यह चेतावनी देते हैं कि मुंह की इस खराब सेहत का दुष्प्रभाव सिर्फ आपके दांतों या मसूड़ों तक ही सीमित नहीं रहता। यह लापरवाही आगे चलकर शरीर के कई बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण अंगों की कार्यप्रणाली को गंभीर रूप से प्रभावित और बीमार कर सकती है।
मसूड़ों का संक्रमण बन सकता है कई क्रॉनिक बीमारियों का आधार
दंत रोग विशेषज्ञों (डेंटिस्ट्स) के अनुसार, मसूड़ों में होने वाला क्रॉनिक ओरल इंफेक्शन शरीर के भीतर लगातार इंफ्लेमेशन (सूजन) को ट्रिगर करता है। खून में बढ़ा हुआ यह अंदरूनी इंफ्लेमेशन आगे चलकर हृदय रोग (हार्ट डिसीज), अनियंत्रित डायबिटीज, फेफड़ों के गंभीर संक्रमण (क्रॉनिक रेस्पिरेटरी इंफेक्शन) और गर्भावस्था के दौरान होने वाली जटिलताओं (जैसे प्री-मैच्योर डिलीवरी) के जोखिम को कई गुना बढ़ाने के लिए जिम्मेदार माना गया है।
जब हम भोजन करते हैं, तो उसके बारीक कण दांतों के बीच फंसे रह जाते हैं। इन कणों पर पनपने वाले बैक्टीरिया एक प्रकार का हानिकारक एसिड बनाते हैं, जो दांतों की सबसे मजबूत बाहरी सुरक्षात्मक परत यानी 'इनेमल' को धीरे-धीरे गला देता है। यदि समय रहते रूट कनाल या फीलिंग जैसा इलाज न कराया जाए, तो यह सड़न दांतों की नसों तक पहुंचकर गहरी कैविटी (खोखलापन) बना देती है।
कार्डियोवैस्कुलर (हृदय) स्वास्थ्य पर पड़ता है सीधा और घातक असर
कार्डियोलॉजी और डेंटल साइंस के संयुक्त अध्ययनों से यह बेहद चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि मसूड़ों की बीमारी (पेरियोडोंटाइटिस) के लिए जिम्मेदार बैक्टीरिया लार और मसूड़ों की सूक्ष्म रक्त वाहिकाओं के माध्यम से सीधे हमारे ब्लड सर्कुलेशन (रक्त प्रवाह) में प्रवेश कर जाते हैं। ये बैक्टीरिया हृदय की धमनियों तक पहुंचकर वहां थक्का या प्लाक जमाने में सहायक हो सकते हैं, जिससे धमनियां सिकुड़ जाती हैं और हृदय संबंधी बीमारियों या स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है।
हालांकि, चिकित्सा विज्ञान यह स्पष्ट करता है कि ओरल हाइजीन खराब होने वाले हर व्यक्ति को दिल की बीमारी होगी ही, ऐसा अनिवार्य नहीं है; लेकिन कमजोर दिल वाले मरीजों या बुजुर्गों में इन दोनों समस्याओं के बीच एक बेहद मजबूत और खतरनाक संबंध देखा गया है।
श्वसन तंत्र को नुकसान: फेफड़ों में संक्रमण का बढ़ता ग्राफ
सांसों की सेहत और ओरल हाइजीन का रिश्ता भी बेहद गहरा है। मुंह के भीतर पनपने वाले ये हानिकारक और संक्रामक बैक्टीरिया हमारी सामान्य सांस लेने की प्रक्रिया के दौरान हवा के साथ सीधे फेफड़ों (लंग्स) की गहराई तक पहुंच सकते हैं। विशेष रूप से बढ़ती उम्र के बुजुर्गों, कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्युनिटी) वाले व्यक्तियों और किसी अन्य बीमारी के कारण लंबे समय से अस्पताल में भर्ती मरीजों में यह बैक्टीरिया सीधे तौर पर 'अस्पिरेशन निमोनिया' जैसे जानलेवा और गंभीर फेफड़ों के संक्रमण का कारण बन जाते हैं।
यही वजह है कि डॉक्टर ओरल हाइजीन को सिर्फ दांतों की सुंदरता से न जोड़कर, हमारे पूरे रेस्पिरेटरी और कार्डियक हेल्थ के लिए एक सुरक्षा कवच मानते हैं।
इन पांच सुनहरे नियमों को अपनाकर रखें अपने ओरल हेल्थ का ध्यान:
यदि आप खुद को इन छिपे हुए खतरों से सुरक्षित रखना चाहते हैं, तो दंत चिकित्सकों द्वारा बताए गए इन आसान नियमों को अपनी दिनचर्या का हिस्सा जरूर बनाएं:
-
दो बार ब्रश: दिन में कम से कम दो बार (सुबह सोकर उठने के बाद और रात को सोने से पहले) फ्लोराइड युक्त टूथपेस्ट से पूरे दो मिनट तक सही तकनीक से ब्रश करें।
-
फ्लॉसिंग और टंग क्लीनिंग: दांतों के बीच फसे बारीक भोजन को निकालने के लिए रोजाना डेंटल फ्लॉस (विशेष धागे) का प्रयोग करें और जीभ पर जमी बैक्टीरिया की परत को टंग क्लीनर से साफ करें।
-
खान-पान पर नियंत्रण: अत्यधिक मीठे, मैदे से बने और दांतों में चिपकने वाले खाद्य पदार्थों (जैसे चॉकलेट, कोल्ड ड्रिंक्स) का सेवन कम से कम करें।
-
भरपूर पानी: भोजन या कुछ भी मीठा खाने के बाद साफ पानी से अच्छी तरह कुल्ला करने की आदत डालें और पूरे दिन पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं ताकि मुंह में लार (सलाइवा) का निर्माण सही से हो, जो प्राकृतिक रूप से बैक्टीरिया को मारता है।
-
नियमित डेंटल चेकअप: दांतों या मसूड़ों में कोई तकलीफ न होने पर भी हर 6 महीने में एक बार किसी योग्य डेंटिस्ट से अपने पूरे मुंह की पेशेवर जांच और स्केलिंग (सफाई) जरूर करवाएं।

वाराणसी-मुंबई सुपरफास्ट एक्सप्रेस के सामने रची गई साजिश, इमरजेंसी ब्रेक से बचा हादसा
गुजरात में पटाखा फैक्ट्री विस्फोट का कहर, 10 लोगों की मौत, कई घायल
छात्र आंदोलन पर सियासत तेज, शिक्षा मंत्री ने राहुल गांधी को घेरा
निशातपुरा स्टेशन का सपना हुआ साकार, तीन ट्रेनों के संचालन से होगी शुरुआत
उपद्रवियों पर दिल्ली पुलिस की बड़ी कार्रवाई, CJP प्रदर्शन मामले में 9 FIR दर्ज
विवाद बढ़ने पर बृज भूषण की सफाई, बोले- आहत भावनाओं के लिए क्षमाप्रार्थी हूं
मध्य प्रदेश में इमरजेंसी रिस्पॉन्स कानून पास, समय पर मदद पहुंचाने की कानूनी गारंटी
छात्र आंदोलन से संसद तक गूंजा विवाद, CJP प्रदर्शन ने बढ़ाई सियासी हलचल
बादल छाए रहेंगे, कई इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश संभव
टंट्याभील चौराहे पर छात्रों का महाजुटान, NEET पेपर लीक के विरोध में लगातार प्रदर्शन