पीरियड्स में असहनीय दर्द को न करें नजरअंदाज, एंडोमेट्रियोसिस का हो सकता है संकेत
मासिक धर्म (पीरियड्स) महिलाओं के शरीर में हर महीने होने वाली एक अत्यंत महत्वपूर्ण और प्राकृतिक जैविक प्रक्रिया है। इसे प्रकृति का एक ऐसा अनूठा उपहार माना जाता है जो महिला के शरीर को मातृत्व (मां बनने की क्षमता) के लिए तैयार करता है। इसके बावजूद, दुनिया भर में करोड़ों महिलाओं को हर महीने इस चक्र के दौरान बेहद जटिल शारीरिक कष्टों से गुजरना पड़ता है। आमतौर पर समाज में यह मान लिया जाता है कि मासिक धर्म है तो दर्द होना एक सामान्य बात है, लेकिन चिकित्सा विशेषज्ञ इस सोच को लेकर गंभीर चेतावनी देते हैं। डॉक्टरों का कहना है कि पीरियड्स के दौरान होने वाला असहनीय और तीव्र दर्द शरीर के भीतर पनप रही किसी छिपी हुई गंभीर बीमारी का प्रारंभिक लक्षण हो सकता है।
गायनोकोलॉजिस्ट (स्त्री रोग विशेषज्ञ) बताते हैं कि इस चक्र में हल्का या मध्यम दर्द होना तो स्वाभाविक है, लेकिन यदि यह दर्द इतना भयानक हो कि आपका उठना-बैठना, दैनिक कार्य करना, स्कूल-कॉलेज या दफ्तर जाना पूरी तरह ठप हो जाए और आपको बार-बार पेनकिलर्स (दर्द निवारक दवाओं) का हैवी डोज लेना पड़े, तो यह एक बेहद चिंताजनक स्थिति है। चिकित्सा विज्ञान में इस तरह की गंभीर समस्या के पीछे 'एंडोमेट्रियोसिस' (Endometriosis) नामक बीमारी को एक मुख्य कारण माना गया है, जिसे समय पर न पहचानने से महिलाएं आगे चलकर इनफर्टिलिटी (बांझपन) का शिकार भी हो सकती हैं।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के चौंकाने वाले आंकड़े: लंबे समय तक बनी रहती है सूजन
विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा जारी की गई वैश्विक रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया भर में प्रजनन आयु वर्ग की लगभग 10% महिलाएं और किशोरियां एंडोमेट्रियोसिस की समस्या से ग्रसित हैं। यह महज मासिक धर्म से जुड़ी कोई सामान्य तकलीफ नहीं है, बल्कि यह शरीर के भीतर लंबे समय तक रहने वाले इंफ्लेमेशन (सूजन) और अंदरूनी घावों का कारण बनती है। इस बीमारी का सीधा और घातक असर पीड़ित महिला की जीवन शैली, मानसिक स्वास्थ्य, कामकाजी क्षमता और उनकी मां बनने की जैविक क्षमता पर पड़ता है।
आखिर क्या है एंडोमेट्रियोसिस और यह शरीर को कैसे पहुंचाती है नुकसान?
यह एक बेहद जटिल और क्रॉनिक (लंबे समय तक चलने वाली) चिकित्सीय स्थिति है। सामान्य स्थिति में गर्भाशय के अंदरूनी हिस्से में बनने वाली परत (जिसे एंडोमेट्रियम कहते हैं), वह इस बीमारी से पीड़ित महिलाओं के गर्भाशय के बाहर अन्य अंगों जैसे कि अंडाशय (ओवरीज), फैलोपियन ट्यूब या पेट के निचले पेल्विक हिस्से के अंगों पर अनियंत्रित रूप से बढ़ने लगती है।
यह बाहरी ऊतक (टिश्यू) भी सामान्य मासिक धर्म चक्र की तरह ही हर महीने मोटे होते हैं, टूटते हैं और इनसे रक्तस्राव भी होता है। चूंकि इस खून को शरीर से बाहर निकलने का कोई प्राकृतिक रास्ता नहीं मिलता, इसलिए यह अंदर ही जमा होकर भयंकर सूजन, अंदरूनी स्कारिंग (घाव के निशान) और असहनीय दर्द का रूप ले लेता है। कई मामलों में यह अंदरूनी अंगों में सिस्ट (गांठ) भी बना लेता है। सबसे बड़ी विडंबना यह है कि लक्षणों को सामान्य मान लेने के कारण इस बीमारी की सटीक पहचान होने में कई साल लग जाते हैं।
हर महिला में अलग हो सकते हैं इसके लक्षण: इन प्रमुख संकेतों को पहचानें
मेडिकल रिपोर्ट्स के अनुसार, इस बीमारी के कारण होने वाली शारीरिक तकलीफें हर महिला में अलग-अलग तीव्रता के साथ सामने आ सकती हैं। इसके कुछ प्रमुख लक्षण निम्नलिखित हैं:
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मासिक धर्म के दौरान पेट के निचले हिस्से, पीठ और पेल्विक एरिया में अत्यधिक और तीव्र दर्द होना।
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वैवाहिक संबंधों (संभोग) के दौरान या उसके तुरंत बाद गहरा और तेज दर्द महसूस होना।
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मलत्याग (शौच) या पेशाब करते समय मरोड़ और असहनीय दर्द होना।
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मासिक धर्म के दौरान बहुत ज्यादा (हैवी ब्लीडिंग) या अनियमित ब्लीडिंग होना।
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लगातार और बिना वजह अत्यधिक थकान बने रहना।
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पेट फूलना, गैस, कब्ज या दस्त जैसी आंतों से जुड़ी क्रॉनिक समस्याएं होना।
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शादी के लंबे समय बाद भी गर्भधारण करने में अत्यधिक कठिनाई आना।
चिकित्सकों का कहना है कि यह तीव्र दर्द गर्भाशय में बनने वाले 'प्रोस्टाग्लैंडिन' नामक विशेष रसायनों के अत्यधिक स्राव के कारण होता है, जो गर्भाशय की मांसपेशियों को सिकोड़ते हैं। लेकिन जब यह दर्द बेहोशी, उल्टी या रोजमर्रा के कामों को रोकने का कारण बने, तो तुरंत जांच जरूरी हो जाती है।
क्यों होती है यह बीमारी और क्या है इसका सही उपचार?
एंडोमेट्रियोसिस होने के सटीक वैज्ञानिक कारणों को लेकर दुनिया भर में अभी भी शोध जारी हैं और इसे पूरी तरह से समझा नहीं जा सका है। हालांकि, चिकित्सा जगत के विशेषज्ञों का मानना है कि इसके पीछे कई सामूहिक कारण जिम्मेदार हो सकते हैं:
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आनुवंशिक कारण (Genetics): यदि परिवार में मां या बहन को यह समस्या रही हो, तो इसका खतरा बढ़ जाता है।
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प्रतिरक्षा प्रणाली की गड़बड़ी: इम्यून सिस्टम का कमजोर होना या सही तरीके से काम न करना।
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हार्मोनल असंतुलन: शरीर में विशेष रूप से 'एस्ट्रोजन' हार्मोन के प्रभाव और असंतुलन को इसका एक बड़ा जिम्मेदार कारक माना जाता है।
बचाव और समाधान: एंडोमेट्रियोसिस को वर्तमान में महिलाओं में बांझपन की एक सबसे बड़ी और मुख्य वजहों में से एक माना गया है, क्योंकि गलत जगहों पर बढ़े हुए ये टिश्यू स्पर्म (शुक्राणु) और एग (अंडे) के मिलन के प्राकृतिक रास्ते में रुकावट पैदा कर देते हैं।
यदि आपको या आपके परिचित में किसी को भी ऐसे लक्षण दिखाई देते हैं, तो बिना किसी झिझक या देरी के तुरंत एक योग्य गायनोकोलॉजिस्ट (स्त्री रोग विशेषज्ञ) से संपर्क कर पेल्विक स्कैन या लेप्रोस्कोपी जैसी जरूरी जांचें करानी चाहिए। डॉक्टर की देखरेख में सही दवाओं, थेरेपी और संतुलित जीवन शैली (लाइफस्टाइल व डाइट में सुधार) के जरिए इस बीमारी के खतरों और इसके दर्द को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।

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