ट्रंप के पूर्व सलाहकार जॉन बोल्टन ने कोर्ट में बदला रुख, क्लासिफाइड दस्तावेज मामले में गुनाह स्वीकार
वॉशिंगटन। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन बोल्टन ने गोपनीय सरकारी दस्तावेजों को अवैध रूप से अपने पास रखने के मामले में संघीय अदालत में अपना गुनाह कबूल कर लिया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पहले कार्यकाल में इस महत्वपूर्ण पद पर रहे 77 वर्षीय बोल्टन ने मैरीलैंड की जिला अदालत में यह दोष स्वीकार किया। इस मामले में बोल्टन और अमेरिकी न्याय विभाग के बीच एक समझौता भी हुआ है, जिससे उनकी संभावित जेल की सजा की अवधि कम हो सकती है, हालांकि सजा पर अंतिम निर्णय अदालत द्वारा ही लिया जाएगा। इस बीच, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर इस पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए बोल्टन की आलोचना की है और उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
जानें क्या हैं जॉन बोल्टन पर लगे आरोप
बोल्टन पर सरकारी सेवा के दौरान तैयार किए गए अपने निजी नोट्स, डायरियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी संवेदनशील जानकारियों को अवैध रूप से अपने पास रखने के कुल 18 आरोप लगाए गए थे। जांच के मुताबिक, उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े अपने दैनिक कामकाज के करीब 1,000 से अधिक पन्नों के गोपनीय दस्तावेजों को अनधिकृत रूप से अपने पास रखा था। इन दस्तावेजों में से कुछ को उन्होंने अपने परिवार के सदस्यों के साथ भी साझा किया था, जिसे अमेरिकी कानून के तहत एक गंभीर सुरक्षा चूक माना गया है।
न्याय विभाग के साथ समझौता और संभावित सजा
अदालती नियमों के अनुसार इस तरह के अपराध के लिए अधिकतम 10 वर्ष तक की जेल का प्रावधान है, लेकिन न्याय विभाग के साथ हुए समझौते के तहत बोल्टन को कुछ राहत मिल सकती है। इस समझौते के मुताबिक, बोल्टन 22.5 लाख अमेरिकी डॉलर का जुर्माना भरने और अपनी सरकारी पेंशन छोड़ने के लिए तैयार हो गए हैं। इसके साथ ही उन्हें जांच अधिकारियों के पूछताछ सत्रों में शामिल होना होगा और 100 घंटे की सामुदायिक सेवा करनी होगी। इस समझौते में उनकी जेल की सजा को अधिकतम 5 साल तक सीमित रखने का सुझाव दिया गया है, जिस पर अदालत आगामी 28 अक्टूबर को अपना अंतिम फैसला सुनाएगी।
दस्तावेजों की लीक और ट्रंप से रिश्तों में खटास
जांच में यह बात सामने आई है कि बोल्टन ने कुछ संवेदनशील दस्तावेज अपनी पत्नी और बेटी को ईमेल के जरिए भेजे थे। हालांकि, ये दस्तावेज उनके परिवार से आगे किसी और तक नहीं पहुंचे, लेकिन पद छोड़ने के बाद बोल्टन का निजी ईमेल खाता ईरान के एक हैकर समूह के निशाने पर आ गया था, जिससे इस गोपनीय डेटा के लीक होने का खतरा पैदा हो गया था। गौरतलब है कि वर्ष 2019 में पद से हटने के बाद बोल्टन ने एक किताब लिखी थी, जिसमें उन्होंने ट्रंप की नीतियों की कड़ी आलोचना की थी, जिसके बाद से ही दोनों नेताओं के बीच संबंध काफी खराब हो गए थे।

भारत-जिम्बाब्वे T20 से पहले जानें हरारे की पिच का हाल, टॉस जीतकर क्या होगा सही फैसला?
काले कपड़ों में विपक्ष का शक्ति प्रदर्शन, संसद में सरकार को घेरा
सीएम थलपति का केंद्र पर निशाना, बोले- NEET परीक्षा खत्म करना ही समाधान
नेपाल की राजनीति में नया मोड़, बालेन शाह भारत-चीन राजदूतों से करेंगे मुलाकात
NEET पेपर लीक को लेकर सदन में गरमाया माहौल, कांग्रेस विधायकों का विरोध प्रदर्शन
CJP प्रदर्शन में शबाना आजमी की तबीयत बिगड़ी, अस्थमा अटैक के बाद बोलीं- 'अब मैं ठीक हूं'
हाईकोर्ट के निर्देशों के बावजूद नहीं थमा विवाद, 103 कर्मचारियों की पात्रता पर फिर बवाल
PCC सड़क का बंटवारा या दबंगई? रीवा में रास्ता रोकने का आरोप
कांग्रेस का संसद परिसर में प्रदर्शन, सरकार पर लगाए गंभीर आरोप
लखनऊ से कई जिलों तक फैला नकली दवाओं का जाल, 20 करोड़ की खेप बरामद; जांच तेज