हेल्दी खाने और एक्सरसाइज के बावजूद थकान क्यों? जानें इसके पीछे की वजह
संतुलित खानपान और नियमित तौर पर जिम-व्यायाम करने के बावजूद क्या आपकी सेहत में अपेक्षित सुधार नहीं हो पा रहा है? क्या सुबह सोकर उठते ही आपको अत्यधिक थकान महसूस होती है, पेट में भारीपन रहता है और लगातार वजन बढ़ता जा रहा है? यदि इन सभी सवालों का जवाब 'हाँ' है, तो आपको अपनी दैनिक दिनचर्या और विशेषकर सूर्यास्त के बाद की गतिविधियों पर गहराई से पुनर्विचार करने की आवश्यकता है। चिकित्सा जगत के जानकार चेतावनी देते हैं कि दिनभर की मेहनत पर पानी फेरने वाली ये समस्याएं असल में आपकी शाम और रात की कुछ अनजानी और गलत आदतों का नतीजा हो सकती हैं।
शाम ढलते ही बदल जाती है शरीर की कार्यप्रणाली
हार्मोनल और फिजियोलॉजी विशेषज्ञों के अनुसार, इंसानी शरीर का आंतरिक चक्र (बॉडी क्लॉक या सर्केडियन रिदम) शाम ढलने के बाद बिल्कुल अलग तरीके से काम करने के लिए प्रोग्राम होता है। इस संवेदनशील समय में की गई छोटी से छोटी लापरवाही भी आगे चलकर मेटाबॉलिज्म से जुड़ी बड़ी बीमारियों का आधार बन जाती है।
आधुनिक कॉर्पोरेट जीवन और काम के अत्यधिक दबाव के चलते अक्सर लोग दफ्तर से देर रात घर लौटते हैं, भूख मिटाने के लिए भारी भोजन करते हैं, मानसिक थकान दूर करने के नाम पर घंटों मोबाइल या टीवी स्क्रीन के सामने आंखें गड़ाए रहते हैं, या फिर चाय-कॉफी का सहारा लेकर देर रात तक काम निपटाते हैं। डिनर समाप्त करते ही सीधे बिस्तर पर सो जाने की यह जीवनशैली भले ही आपको सामान्य और विवशता लगती हो, परंतु यह आपके आंतरिक अंगों पर जानलेवा दबाव डाल रही होती है।
रात का समय: शरीर की मरम्मत और आंतरिक रिकवरी का मुख्य चरण
विभिन्न मेडिकल रिसर्च और लैबोरेटरी रिपोर्ट्स से यह प्रमाणित हो चुका है कि रात का समय मानव शरीर के भीतर जीर्ण-शीर्ण हो चुकी कोशिकाओं (सेल्स) की मरम्मत, टिशू रिकवरी और हार्मोनल संतुलन के लिए सबसे महत्वपूर्ण कालखंड होता है। इसी अवधि के दौरान मस्तिष्क दिनभर के तनाव और सूचनाओं के बोझ को प्रोसेस कर खुद को तरोताजा करता है।
परंतु, यदि इस निर्धारित समय पर पेट में गरिष्ठ भोजन डाल दिया जाए, आँखों के सामने लगातार कृत्रिम रोशनी बनी रहे, या सोने का कोई निश्चित समय न हो, तो शरीर अपनी मरम्मत का काम छोड़कर भोजन पचाने और जागते रहने के संघर्ष में लग जाता है। इससे शरीर की प्राकृतिक रिकवरी प्रक्रिया पूरी तरह बाधित हो जाती है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों द्वारा जारी मुख्य स्वास्थ्य गाइडलाइंस
दीर्घायु और निरोगी जीवन के लिए चिकित्सा विज्ञानियों ने निम्नलिखित आदतों में तत्काल सुधार की सिफारिश की है:
1. डिजिटल स्क्रीन से बनाएं दूरी (स्लीप साइकिल सुधारें)
रात के समय स्मार्टफोन, लैपटॉप या टेलीविजन की स्क्रीन से उत्सर्जित होने वाली हानिकारक 'ब्लू लाइट' (नीली रोशनी) मस्तिष्क में नींद लाने वाले मुख्य हार्मोन 'मेलाटोनिन' के स्राव को पूरी तरह रोक देती है। इसके चलते अनिद्रा (इंसोमनिया) और अधूरी नींद की समस्या जन्म लेती है। विशेषज्ञों की सलाह है कि सोने के समय से कम से कम एक घंटे पहले सभी प्रकार के डिजिटल गैजेट्स को पूरी तरह बंद कर देना चाहिए।
2. डिनर की टाइमिंग और जंक फूड का त्याग
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पाचन की धीमी गति: सूर्यास्त के बाद शरीर की जठराग्नि और पाचन क्रिया प्राकृतिक रूप से मंदी हो जाती है। ऐसे में देर रात पिज्जा, बर्गर, पैकेटबंद चिप्स या अत्यधिक तैलीय और मसालेदार भोजन का सेवन करने से एसिडिटी, पेट फूलना (ब्लोटिंग) और शरीर में अवांछित कैलोरी (चर्बी) जमा होने लगती है।
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8 बजे की समय-सीमा: स्वास्थ्य सुरक्षा के लिहाज से रात का भोजन (डिनर) हर हाल में रात 8:00 बजे से पहले संपन्न कर लेना चाहिए।
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भोजन के बाद वॉक: डिनर करने के तुरंत बाद बिस्तर पर लेटने की आदत बेहद खतरनाक है। भोजन के उपरांत 10 से 15 मिनट की सामान्य सैर (वॉक) पाचन तंत्र को सुचारू रखने, ब्लड शुगर को नियंत्रित करने और भोजन के बेहतर अवशोषण में क्रांतिकारी लाभ देती है।
शाम के समय भूलकर भी न करें ये गलतियां
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लेट नाइट कैफीन: रात 8:00 बजे के बाद चाय, कॉफी, डार्क चॉकलेट या किसी भी तरह के एनर्जी ड्रिंक का सेवन नींद की गहराई (डीप स्लीप) को नष्ट कर देता है, जिससे अगली सुबह शरीर भारी और थका हुआ रहता है।
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मसालेदार भोजन से तौबा: रात में अत्यधिक तीखा या गरिष्ठ भोजन खाने से 'एसिड रिफ्लक्स' (सीने में जलन) की समस्या बढ़ जाती है, जो हृदय स्वास्थ्य के लिए भी ठीक नहीं है।
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जैविक घड़ी का असंतुलन: प्रतिदिन सोने और जागने का समय बदलना शरीर की जैविक घड़ी को भ्रमित कर देता है। इसका सीधा दुष्प्रभाव आपके थायराइड, इंसुलिन जैसे महत्वपूर्ण हार्मोन्स, ऊर्जा के स्तर और समग्र मेटाबॉलिज्म पर पड़ता है।

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