मेडिसिन खरीदने से पहले पढ़ें यह जरूरी सूचना, नहीं तो हो सकती है परेशानी
देश में आम जनता के स्वास्थ्य की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए केंद्र सरकार ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण कदम उठाया है। सरकार ने तत्काल प्रभाव से 16 फिक्स्ड-डोज कॉम्बिनेशन (FDC) दवाओं के निर्माण, विपणन (बिक्री) और वितरण पर पूरी तरह से रोक लगा दी है।
क्यों लगाया गया इन दवाओं पर प्रतिबंध?
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय और औषधि विशेषज्ञों की गहन समीक्षा में यह बात सामने आई है कि इन कॉकटेल (मिश्रित) दवाओं के फॉर्मूले का कोई भी ठोस चिकित्सीय या वैज्ञानिक आधार नहीं है। सरकार के अनुसार:
-
जोखिम की आशंका: इन कॉम्बिनेशन दवाओं के इस्तेमाल से मरीजों को फायदे के बजाय गंभीर स्वास्थ्य संबंधी नुकसान होने का अंदेशा बना हुआ था।
-
प्रभावशीलता की कमी: वैज्ञानिक पैमानों पर यह दवाएं खरी नहीं उतरीं, जिसके कारण इनका लगातार उपयोग इंसानी शरीर के लिए किसी भी तरह से लाभदायक नहीं माना गया।
मरीजों की सुरक्षा सर्वोपरि: स्वास्थ्य मंत्रालय
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने इस कड़े फैसले पर स्पष्टीकरण देते हुए कहा है कि यह कदम देशवासियों की सेहत की सुरक्षा और दवाओं के सही व सुरक्षित इस्तेमाल को बढ़ावा देने के उद्देश्य से उठाया गया है। इस प्रतिबंध का मुख्य लक्ष्य यह पक्का करना है कि देश के बाजारों में केवल वही दवाएं उपलब्ध रहें जो पूरी तरह से असरदार, सुरक्षित और आधुनिक चिकित्सा विज्ञान द्वारा प्रमाणित हों।

शराबी ने पुलिस की बोलेरो से मचाई तबाही, आठ लोगों को कुचलने के बाद बड़ा खुलासा
रेलवे स्टेशन पर जमकर हंगामा, RPF पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाकर शख्स ने किया प्रदर्शन
मनोज मुंतशिर का बड़ा खुलासा, बोले- 'आदिपुरुष' मेरी जिंदगी का सबसे गलत फैसला था
ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर चिंता के संकेत, नाबार्ड रिपोर्ट में आय और भविष्य के भरोसे में गिरावट
शेखर सुमन ने छात्रों के समर्थन में उठाई आवाज, भावुक बयान से सोशल मीडिया पर छिड़ी चर्चा
वाहन खरीद-बिक्री और जमीन दलाली के नाम पर बड़ा फर्जीवाड़ा, करोड़ों की ठगी का खुलासा
₹88 करोड़ की ठगी का आरोपी गिरफ्त में, यूएई से भारत पहुंचा मास्टरमाइंड अविनाश राठौड़
वाराणसी में क्रूरता की इंतहा, चाकू के वार से रॉटविलर की मौत, पिटबुल अस्पताल में भर्ती
हाईकोर्ट का ऐतिहासिक आदेश, दागी वकीलों के मुकदमे अब कानपुर नहीं, उन्नाव में चलेंगे
राहुल हादसे में मौत के बाद परिजनों का सवाल, अवैध ब्रेकर पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई?