बयानबाजी ने बढ़ाई TMC-कांग्रेस के एकीकरण की अटकलें
नई दिल्ली। कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस (TMC) के बीच भविष्य के सियासी रिश्तों को लेकर एक बार फिर कयासों का दौर शुरू हो गया है। दिल्ली में आयोजित कांग्रेस की एक अहम रणनीतिक बैठक के बाद आलाकमान ने टीएमसी के साथ किसी भी तरह के विलय की खबरों को पूरी तरह सिरे से खारिज कर दिया है। इसके बावजूद, कांग्रेस के ही कुछ नेताओं की हालिया बयानबाजी ने राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं को दोबारा हवा दे दी है।
करीब साढ़े तीन घंटे तक चली इस उच्च स्तरीय बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा सहित पार्टी के कई दिग्गज नेता और प्रदेश अध्यक्ष मौजूद रहे। बैठक के बाद कांग्रेस महासचिव के. सी. वेणुगोपाल ने स्थिति साफ करते हुए कहा कि ममता बनर्जी की कांग्रेस नेतृत्व से हुई मुलाकातें पूरी तरह औपचारिक थीं और विलय की बातें सिर्फ अफवाह हैं। हालांकि, राजनीति के जानकार इसे अंतिम फैसला मानने से कतरा रहे हैं, क्योंकि अक्सर बड़े सियासी फैसलों से पहले दल इस तरह की गोपनीयता बनाए रखते हैं।
बंगाल कांग्रेस अध्यक्ष के बयान से गरमाई सियासत
इस पूरे घटनाक्रम के बीच पश्चिम बंगाल कांग्रेस के नवनियुक्त अध्यक्ष शुभंकर सरकार के एक बयान ने इन अटकलों को और ज्यादा हवा दे दी है। उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा कि राजनीति संभावनाओं का खेल है और भविष्य की परिस्थितियों को लेकर अभी से कुछ भी पक्का नहीं कहा जा सकता। इसके साथ ही उन्होंने देश और संविधान की रक्षा के लिए सभी विपक्षी ताकतों को राहुल गांधी के नेतृत्व में एकजुट होने की जरूरत पर भी बल दिया। उनके इस रुख को राजनीतिक विशेषज्ञ आने वाले समय में किसी बड़े गठबंधन या नए समीकरण के शुरुआती संकेत के रूप में देख रहे हैं।
बंगाल की जमीनी हकीकत और 'वेट एंड वॉच' की नीति
सूत्रों के मुताबिक, पश्चिम बंगाल के मौजूदा राजनीतिक हालात और विपक्षी खेमे की हलचल को देखते हुए कांग्रेस फिलहाल 'देखो और इंतजार करो' (वेट एंड वॉच) की रणनीति पर चल रही है। पार्टी बंगाल में अपने कैडर को मजबूत करने के साथ-साथ विपक्षी एकजुटता के संतुलन को भी परख रही है। दूसरी तरफ, तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के भीतर भी अपनी संगठनात्मक चुनौतियों और आगामी चुनावों को लेकर आंतरिक मंथन का दौर जारी है।
फिलहाल अटकलों और बयानों तक सीमित है हलचल
भले ही दोनों पार्टियों के बीच पर्दे के पीछे किसी खिचड़ी पकने के दावे किए जा रहे हों, लेकिन हकीकत यह है कि टीएमसी और कांग्रेस के विलय या नए स्वरूप में साथ आने को लेकर अभी तक कोई भी आधिकारिक पहल नहीं हुई है। दोनों ही तरफ के शीर्ष नेतृत्व ने इस पर चुप्पी साध रखी है। यही वजह है कि फिलहाल इस पूरे घटनाक्रम को केवल राजनीतिक कयासबाजी, बयानों के तीर और कूटनीतिक दबाव बनाने की रणनीति के तौर पर ही देखा जा रहा है।

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