नामांकन रद्द होने पर बढ़ा सियासी संग्राम, कांग्रेस आज सुप्रीम कोर्ट में करेगी चुनौती
भोपाल। मध्य प्रदेश में राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी पारा लगातार चढ़ता जा रहा है। कांग्रेस प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन का नामांकन पत्र निरस्त किए जाने के मामले में मुख्य चुनाव आयोग से अब तक मुख्य विपक्षी दल को कोई राहत नहीं मिल सकी है। कांग्रेस के एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने इस संबंध में नई दिल्ली में निर्वाचन आयोग के वरिष्ठ अधिकारियों से भेंट कर रिटर्निंग ऑफिसर के आदेश को पलटने की गुहार लगाई थी, परंतु आयोग की तरफ से फिलहाल कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं आई है। निर्वाचन अधिकारियों की ओर से राहत न मिलने के बाद अब कांग्रेस इस कानूनी लड़ाई को देश की शीर्ष अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट ले जाने की रणनीति बना रही है। गौरतलब है कि राज्यसभा चुनाव के तहत नामांकन वापस लेने की समयसीमा का आज आखिरी दिन है। यदि सर्वोच्च न्यायालय की ओर से इस मामले में तत्काल कोई दखल नहीं दिया जाता है, तो प्रदेश की तीनों सीटों पर मतदान की नौबत ही नहीं आएगी और सत्ताधारी दल के तीनों प्रत्याशियों का निर्विरोध चुना जाना तय है।
इस वजह से निरस्त हुआ नामांकन पत्र
कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का पर्चा बीते 9 जून को संवीक्षा (जांच) के दौरान निर्वाचन अधिकारी अरविंद शर्मा द्वारा खारिज कर दिया गया था। भारतीय जनता पार्टी ने उनके नामांकन पर लिखित आपत्ति दर्ज कराते हुए दावा किया था कि उन्होंने अपने चुनावी हलफनामे में तेलंगाना की एक अदालत में विचाराधीन एक कानूनी मामले की जानकारी को जानबूझकर छिपाया है। भाजपा नेताओं का तर्क है कि नियमों के मुताबिक प्रत्येक उम्मीदवार के लिए अपने खिलाफ चल रहे सभी आपराधिक या विधिक मामलों का ब्योरा देना कानूनी रूप से अनिवार्य है और जानकारी अधूरी होने के कारण ही यह कार्रवाई की गई है। इसके विपरीत कांग्रेस का कहना है कि जब तक किसी मामले में अदालत द्वारा औपचारिक रूप से आरोप तय (चार्ज फ्रेम) नहीं कर दिए जाते, तब तक उसे लंबित आपराधिक मामला नहीं माना जा सकता, इसलिए शपथ पत्र में इसका उल्लेख करना जरूरी नहीं था।
भाजपा प्रत्याशियों की निर्विरोध जीत के आसार
यदि इस कानूनी पेंच में कांग्रेस को सुप्रीम कोर्ट या चुनाव आयोग से समय रहते कोई बड़ी राहत नहीं मिलती है, तो भारतीय जनता पार्टी के तीनों उम्मीदवारों की लॉटरी लग सकती है। ऐसी स्थिति में भाजपा प्रत्याशी तरुण चुग, रजनीश अग्रवाल और महेश केवट बिना किसी मुकाबले के निर्विरोध राज्यसभा सांसद निर्वाचित घोषित कर दिए जाएंगे। इस राजनीतिक घटनाक्रम ने मध्य प्रदेश के सियासी गलियारों में हलचल पैदा कर दी है और विपक्ष के हाथ से एक बड़ी सीट खिसकती हुई नजर आ रही है।
भविष्य की रणनीति के लिए दिल्ली में मंथन
इस पूरे विवाद और आगामी कानूनी कदमों पर गहराई से विचार-विमर्श करने के लिए देश की राजधानी दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय में एक आपात व महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई है। इस उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे कर रहे हैं, जिसमें देश के विभिन्न राज्यों के प्रदेश अध्यक्षों के साथ-साथ पार्टी के शीर्ष विधिक सलाहकार और संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारी शामिल हुए हैं। इस बैठक का मुख्य एजेंडा मध्य प्रदेश के इस चुनावी संकट से निपटना और सुप्रीम कोर्ट में मजबूती से पक्ष रखने की रूपरेखा तैयार करना है।

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