चुनावी मुद्दे पर बढ़ा विवाद, कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया
भोपाल: मध्य प्रदेश में राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी काफी तेज हो गई है। कांग्रेस की राज्यसभा उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन पत्र खारिज होने के बाद मामला अब देश की सबसे बड़ी अदालत तक पहुंच गया है। पार्टी ने बुधवार को इस फैसले के खिलाफ चुनाव आयोग का रुख किया था, लेकिन गुरुवार सुबह तक आयोग की तरफ से कोई आधिकारिक फैसला नहीं आने के कारण कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर दी है। कांग्रेस की ओर से गुरुवार सुबह ही अवकाशकालीन पीठ के सामने इस मामले पर तुरंत सुनवाई करने की मांग की जा सकती है। इससे पहले कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के एक दल ने दिल्ली में चुनाव आयोग के दफ्तर जाकर रिटर्निंग ऑफिसर के उस आदेश को रद्द करने की मांग की थी, जिसके तहत नामांकन खारिज किया गया था।
क्या है पूरा विवाद?
इस पूरे विवाद की शुरुआत तब हुई जब भाजपा ने राज्यसभा चुनाव के लिए कांग्रेस प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन के नामांकन पत्र पर आपत्ति जताई। भाजपा का आरोप है कि मीनाक्षी नटराजन ने अपने चुनावी हलफनामे में हैदराबाद की एक अदालत में चल रहे एक मामले की जानकारी छिपाई है, जो कि नियमों का उल्लंघन है। इसी आधार पर उनका नामांकन रद्द करने की मांग की गई थी, जिसे स्वीकार करते हुए रिटर्निंग ऑफिसर ने नामांकन पत्र खारिज कर दिया। दूसरी तरफ, कांग्रेस ने भाजपा के इन आरोपों का पुरजोर खंडन किया है। कांग्रेस का कहना है कि मीनाक्षी नटराजन के खिलाफ कोई भी आपराधिक मामला या एफआईआर दर्ज नहीं है। उन्हें केवल अदालत से एक सामान्य नोटिस मिला था, जिसे हलफनामे में लिखना कानूनी रूप से जरूरी नहीं था क्योंकि किसी भी कोर्ट ने अभी तक उन पर कोई आरोप तय नहीं किए हैं।
आज नाम वापसी की अंतिम तारीख
गुरुवार यानी 11 जून को राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन वापस लेने का आखिरी दिन है। ऐसे में मध्य प्रदेश के इस सियासी घटनाक्रम ने पूरी चुनावी प्रक्रिया को बेहद दिलचस्प और उलझा दिया है। अब हर किसी की नजरें चुनाव आयोग के अंतिम रुख और सुप्रीम कोर्ट में होने वाली संभावित सुनवाई पर टिकी हुई हैं कि वहां से क्या फैसला आता है।
नेताओं के बीच जुबानी जंग तेज
इस पूरे घटनाक्रम पर खुद मीनाक्षी नटराजन ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि कांग्रेस आज एक ऐसे राजनीतिक दलदल से लड़ रही है, जहां सिर्फ विपक्षी दलों से ही नहीं बल्कि उन संवैधानिक संस्थाओं से भी मुकाबला करना पड़ रहा है जिन्हें लोकतंत्र की रक्षा के लिए बनाया गया था। उन्होंने रिटर्निंग ऑफिसर पर निष्पक्ष काम न करने और सरकार के प्रतिनिधि की तरह व्यवहार करने का आरोप लगाते हुए इसे राजनीतिक द्वेष की कार्रवाई बताया। वहीं, कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने भी सरकार और व्यवस्था पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि संविधान को ताक पर रखकर यह कार्रवाई की गई है। इसके विरोध में उन्होंने भोपाल में पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ एक दिन का उपवास भी रखा और कहा कि कांग्रेस के विधायक धनबल या किसी दबाव के आगे झुकने वाले नहीं हैं और वे इस लड़ाई को मजबूती से लड़ेंगे।

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