ट्रेडिंग से मुनाफा कमाने वालों के लिए अलर्ट, टैक्स नियमों की अनदेखी पड़ सकती है भारी
नई दिल्ली। शेयर बाजार में ट्रेडिंग के जरिए मुनाफा कमाने वाले अधिकांश लोग इस बात से पूरी तरह अनजान होते हैं कि अलग-अलग तरीकों से होने वाली इस कमाई पर आयकर के नियम पूरी तरह जुदा हैं। यदि आप भी टैक्स के इन पेचीदा नियमों को समझे बिना ट्रेडिंग की दुनिया में हाथ आजमा रहे हैं, तो आयकर विभाग के दिशानिर्देशों को बारीकी से जान लेना बेहद जरूरी है, अन्यथा भविष्य में आपको विभाग की ओर से बड़ा नोटिस या वित्तीय नुकसान झेलना पड़ सकता है।
इंट्राडे और एफएंडओ निवेश नहीं बल्कि व्यावसायिक आय का हिस्सा
आमतौर पर शेयर बाजार के नए कारोबारी ट्रेडिंग से होने वाले मुनाफे को कैपिटल गेन्स (पूंजीगत लाभ) समझने की भूल कर बैठते हैं। हालांकि, टैक्स विभाग के नियमानुसार इंट्राडे (एक ही दिन में खरीद-बिक्री) और वायदा-विकल्प (F&O) की ट्रेडिंग को निवेश की श्रेणी में नहीं, बल्कि एक सक्रिय व्यवसाय (बिजनेस) माना जाता है। यही वजह है कि इससे होने वाले हर नफा-नुकसान को आयकर रिटर्न (ITR) दाखिल करते समय 'व्यापार या पेशे से लाभ' (प्रॉफिट एंड गेन्स फ्रॉम बिजनेस और प्रोफेशन) के कॉलम में दर्ज करना अनिवार्य है। इस कमाई पर कोई रियायती टैक्स रेट नहीं लगता, बल्कि यह आपकी कुल सालाना आय में जुड़ती है और आपके निर्धारित टैक्स स्लैब के अनुसार इस पर टैक्स वसूला जाता है।
सट्टा व्यवसाय की श्रेणी में आती है इंट्राडे ट्रेडिंग और नुकसान की शर्तें कड़वी
आयकर अधिनियम की धारा 43(5) के तहत यदि आप किसी शेयर को एक ही कारोबारी सत्र के भीतर खरीदकर वापस बेच देते हैं, तो उससे होने वाले लाभ को 'सट्टा व्यवसाय आय' (स्पेक्ट्युलेटिव बिजनेस इनकम) की श्रेणी में रखा जाता है। इस आय पर भी आपके सामान्य टैक्स स्लैब के हिसाब से ही देनदारी बनती है। हालांकि, सबसे कड़ा नियम इसके नुकसान (घाटे) को लेकर है। यदि आपको इंट्राडे ट्रेडिंग में कोई घाटा होता है, तो उसकी भरपाई केवल इंट्राडे या किसी अन्य सट्टा कारोबार से होने वाले मुनाफे से ही की जा सकती है। इसके अलावा, इस तरह के व्यावसायिक घाटे को आप अधिकतम आगामी 4 वित्तीय वर्षों के लिए ही आगे (कैरी फॉरवर्ड) ले जा सकते हैं।
गैर-सट्टा आय है वायदा-विकल्प और समय पर रिटर्न भरना अनिवार्य
टैक्स कानूनों के अनुसार, वायदा और विकल्प (F&O) से होने वाली आय या नुकसान को सट्टा नहीं, बल्कि 'गैर-सट्टा व्यावसायिक आय' (नॉन-स्पेक्ट्युलेटिव बिजनेस इनकम) माना जाता है। इसमें ट्रेडर्स को यह बड़ी राहत मिलती है कि यदि एफएंडओ में घाटा हुआ है, तो उसे उसी साल सैलरी इनकम को छोड़कर अन्य सभी आय (जैसे मकान का किराया, ब्याज या अन्य व्यापारिक मुनाफा) के साथ एडजस्ट (सेट-ऑफ) किया जा सकता है। बचे हुए नुकसान को अगले 8 सालों तक आगे ले जाने की अनुमति भी मिलती है। ऐसे कारोबारियों को आईटीआर-3 या आईटीआर-4 फॉर्म भरना होता है। ध्यान रहे कि यदि आपकी आय 2.5 लाख रुपये या कुल टर्नओवर 25 लाख रुपये से अधिक है, तो खाते बही (बुक्स ऑफ अकाउंट्स) रखना कानूनी रूप से जरूरी है। बिना ऑडिट वाले मामलों के लिए रिटर्न की अंतिम तिथि 31 अगस्त 2026 है, जबकि टैक्स ऑडिट की स्थिति में आखिरी तारीख 31 अक्टूबर 2026 तय की गई है। यदि आप समय सीमा चूकते हैं, तो घाटे को आगे ले जाने का अधिकार छिन जाएगा। इसके साथ ही, बाजार में आईपीओ की हलचल भी तेज है, जहां 8 जून को एसएमआर ज्वेल्स और मेरीट्रोनिक्स, 9 जून को हेक्जागोन न्यूट्रिशन, 11 जून को वाह केमिकल्स और यूएचएम वेकेशन तथा 12 जून को सीएमआर ग्रीन टेक्नोलॉजी व जेनएक्सएआई एनालिटिक्स की लिस्टिंग होने जा रही है।

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