सुलग उठा मिडिल ईस्ट: सीजफायर के बीच हिजबुल्ला के मिसाइल अटैक से सीमाई इलाकों में गूंजे सायरन
तेल अवीव | पश्चिम एशिया में अमन-चैन की हालिया कोशिशों को एक बार फिर बड़ा झटका लगा है। इस्राइली रक्षा बलों (आईडीएफ) ने दावा किया है कि लेबनान के सशस्त्र संगठन हिजबुल्ला ने उसके लड़ाकू विमानों को निशाना बनाते हुए सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें दागी हैं। हैरान करने वाली बात यह है कि यह हमला दोनों पक्षों के बीच संघर्ष विराम समझौते पर सहमति बनने के महज कुछ दिनों बाद ही हुआ है। इस औचक हमले के बाद उत्तरी इस्राइल के सीमावर्ती इलाकों में हवाई हमले के सायरन गूंज उठे, जिससे दहशत में आए हजारों नागरिकों को बंकरों में शरण लेनी पड़ी। हालांकि, इस्राइली सेना ने स्पष्ट किया है कि इस घटना में उनके किसी भी विमान को कोई क्षति नहीं पहुंची है और न ही कोई हताहत हुआ है।
सीमावर्ती इलाकों में मची अफरा-तफरी
सैन्य अधिकारियों के मुताबिक, हिजबुल्ला की ओर से दागी गई मिसाइलों के तुरंत बाद किरीयत शमोना शहर समेत लेबनान सीमा से सटे आठ अन्य ग्रामीण इलाकों में रेड अलर्ट जारी कर दिया गया। सायरन बजते ही पूरे क्षेत्र में भय का माहौल पैदा हो गया और प्रशासन ने नागरिकों को फौरन सुरक्षित स्थानों पर जाने की हिदायत दी। राहत की बात यह रही कि इस्राइली वायुसेना के विमान इस हमले के दौरान पूरी तरह सुरक्षित रहे। यह हिंसक घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब अमेरिकी मध्यस्थता के जरिए दोनों देश युद्ध रोकने पर सहमत हुए थे।
संघर्ष विराम समझौते के बीच ईरान की भूमिका
वाशिंगटन में हुई त्रिपक्षीय उच्च स्तरीय वार्ता के बाद दोनों पक्षों ने युद्धविराम पर रजामंदी जताई थी, लेकिन जमीनी हकीकत इसके उलट नजर आ रही है। ईरान समर्थित हिजबुल्ला का आक्रामक रुख अब भी बरकरार है। उधर, ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने भी एक बयान जारी कर कहा है कि इस शांति समझौते में लेबनानी मोर्चे पर पूरी तरह से युद्ध रोकने की शर्तें शामिल हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस बयान से यह साफ हो जाता है कि लेबनान का यह संकट अब केवल स्थानीय मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि इसमें ईरान और क्षेत्रीय राजनीति का बड़ा दखल है।
लेबनानी राष्ट्रपति ने जताई युद्ध से नाराजगी
इस पूरे घटनाक्रम पर लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ आउन ने ईरान के रुख पर कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि उनके देश को अमेरिका और ईरान के बीच चलने वाली आपसी सौदेबाजी का जरिया नहीं बनाया जाना चाहिए। राष्ट्रपति आउन ने कहा कि लेबनान की आम जनता अब इस लंबे खिंचते युद्ध से पूरी तरह टूट चुकी है और सिर्फ शांति चाहती है। उन्होंने हिजबुल्ला नेतृत्व की बयानबाजी की निंदा करते हुए कहा कि किसी संगठन विशेष के एजेंडे से ऊपर देश के नागरिकों की इच्छा होनी चाहिए और इस समस्या का स्थाई समाधान केवल आपसी संवाद से ही मुमकिन है।

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