बिकवाली के बीच FPIs को बड़ी राहत: सरकारी बॉन्ड्स में निवेश पर कैपिटल गेन्स टैक्स से मिली छूट, रुपया थामने की कोशिश
नई दिल्ली | केंद्र सरकार ने देश में डॉलर की आवक बढ़ाने और कमजोर होते रुपये को मजबूती देने के लिए एक बड़ा नीतिगत फैसला लिया है। शुक्रवार को जारी एक नए अध्यादेश के माध्यम से सरकार ने आयकर अधिनियम में महत्वपूर्ण संशोधन किया है। इसके तहत विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) द्वारा भारतीय सरकारी प्रतिभूतियों (G-Secs) में किए जाने वाले निवेश पर लगने वाले लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG) टैक्स को पूरी तरह से समाप्त कर दिया गया है। इस कदम का मुख्य लक्ष्य भारतीय ऋण बाजार में लंबी अवधि के विदेशी निवेश को आकर्षित करना है।
भारी विदेशी निकासी और टैक्स में मिली बड़ी राहत
इस नए अध्यादेश के लागू होने से पहले विदेशी संस्थागत निवेशकों को सरकारी प्रतिभूतियों से होने वाले मुनाफे पर 12.5 प्रतिशत की दर से लंबी अवधि का पूंजीगत लाभ कर (एलटीसीजी) देना पड़ता था। सरकार का यह फैसला ऐसे समय में आया है जब वैश्विक तनाव के कारण विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से इस साल अब तक 2.6 लाख करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि वापस निकाल ली है। यह बिकवाली पिछले साल (2025) की कुल 1.66 लाख करोड़ रुपये की निकासी से कहीं ज्यादा है। केवल जून के शुरुआती तीन दिनों में ही विदेशी फंड्स ने बाजार से 34,000 करोड़ रुपये निकाल लिए थे, जिसके बाद बाजार को संभालने के लिए सरकार ने यह कर छूट दी है।
ऐतिहासिक निचले स्तर पर रुपया और विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव
विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली, महंगे कच्चे तेल, बढ़ते व्यापार घाटे और अमेरिकी टैरिफ के चौतरफा दबाव के कारण भारतीय करेंसी ऐतिहासिक गिरावट का सामना कर रही है। हाल ही में रुपया डॉलर के मुकाबले अपने अब तक के सबसे निचले स्तर 96.86 पर बंद हुआ था। इस साल अब तक रुपये में करीब 7 प्रतिशत की गिरावट आ चुकी है। रुपये को संभालने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) लगातार बाजार में डॉलर बेच रहा है, जिससे देश का विदेशी मुद्रा भंडार भी घटकर 681.384 अरब डॉलर पर आ गया है, जो फरवरी में 728.494 अरब डॉलर के अपने रिकॉर्ड स्तर पर था। स्थिति को सुधारने के लिए आरबीआई ने विदेशी निवेशकों के लिए बिना किसी सीमा के कुछ लंबी अवधि के सॉवरेन नोट्स खरीदने की भी अनुमति दी है।
भारतीय अर्थव्यवस्था और ऋण बाजार पर दिखेगा सकारात्मक असर
सरकारी प्रतिभूतियां (जी-सैक्स) असल में केंद्र या राज्य सरकारों द्वारा फंड जुटाने के लिए जारी किए जाने वाले सुरक्षित निवेश साधन होते हैं। अब इन पर टैक्स खत्म होने से विदेशी निवेशकों का शुद्ध मुनाफा बढ़ जाएगा, जिससे भारतीय बॉन्ड बाजार उनके लिए बेहद आकर्षक बन जाएगा। इस फैसले से बाजार में विदेशी मुद्रा का प्रवाह तेज होने की उम्मीद है, जिससे वित्तीय तंत्र में लिक्विडिटी (तरलता) बढ़ेगी। यह कदम न केवल रुपये के अवमूल्यन को रोकने में मदद करेगा, बल्कि सरकार के लिए विकास और बुनियादी ढांचा (इंफ्रास्ट्रक्चर) परियोजनाओं के लिए विदेशी पूंजी जुटाना भी काफी आसान बना देगा।

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