मंत्री बनते ही इस्तीफा, रामलिंगा रेड्डी बोले- पार्टी में बने रहेंगे
बेंगलुरु: कर्नाटक सरकार में मंत्रियों के विभागों का बंटवारा होते ही राजनीतिक गलियारों में असंतोष की खबरें सामने आने लगी हैं। वरिष्ठ कांग्रेस नेता और आठ बार के विधायक रामलिंगा रेड्डी कैबिनेट में किए गए विभागों के आवंटन से काफी नाराज हैं। उन्हें जल संसाधन (वाटर रिसोर्सेज) विभाग की जिम्मेदारी सौंपी गई थी, जिससे असहमत होकर उन्होंने मंत्री पद से अपना इस्तीफा दे दिया है।
रामलिंगा रेड्डी ने क्यों दिया इस्तीफा?
दरअसल, मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने अपने कैबिनेट के 13 मंत्रियों के बीच विभागों का बंटवारा किया था। इस फेरबदल में रामलिंगा रेड्डी को उम्मीद थी कि उन्हें बेंगलुरु विकास विभाग (बेंगलुरु डेवलपमेंट मिनिस्ट्री) की कमान मिलेगी, जिसे राज्य के सबसे महत्वपूर्ण विभागों में से एक माना जाता है। हालांकि, यह विभाग कृष्णा बायरे गौड़ा को सौंप दिया गया और रेड्डी को सिंचाई विभाग दे दिया गया। सूत्रों के अनुसार, विभागों के आवंटन के लिए हुई बैठक के दौरान ही रेड्डी ने अपनी नाराजगी जाहिर की थी और वह बैठक बीच में ही छोड़कर चले गए थे। उन्होंने मुख्यमंत्री को साल 2023 में किए गए उस वादे की भी याद दिलाई, जिसमें भविष्य के कैबिनेट फेरबदल में उन्हें बेंगलुरु विकास विभाग देने की बात कही गई थी।
इस्तीफे के बाद रेड्डी का रुख
मंत्री पद छोड़ने के बाद रामलिंगा रेड्डी ने साफ किया है कि उन्होंने केवल सरकार में अपना पद छोड़ा है, कांग्रेस पार्टी नहीं। उन्होंने कहा कि वह अपनी अंतरात्मा के खिलाफ जाकर काम नहीं कर सकते थे, इसलिए उन्होंने यह कदम उठाया। रेड्डी ने अपनी निष्ठा दोहराते हुए कहा कि वह पिछले 53 वर्षों से कांग्रेस से जुड़े हुए हैं और आगे भी विधायक के रूप में पार्टी में बने रहेंगे। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि वह पूर्व मुख्यमंत्री एम. वीरप्पा मोइली और एस.एम. कृष्णा की सरकारों में भी मंत्री पद संभाल चुके हैं और उन्होंने कभी किसी पद की मांग नहीं की, बल्कि पार्टी ने हमेशा उन्हें बड़ी जिम्मेदारियां दी हैं।
पार्टी के भीतर हलचल और सुलह की कोशिशें
रामलिंगा रेड्डी के इस कदम के बाद कांग्रेस आलाकमान और राज्य सरकार में हलचल तेज हो गई है। इस पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए कैबिनेट मंत्री प्रियंक खरगे ने कहा कि रामलिंगा रेड्डी पार्टी और राज्य दोनों के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण और सम्मानित नेता हैं। उन्होंने भरोसा जताया कि कांग्रेस की अंदरूनी बातचीत और सुलह की परंपरा के जरिए पार्टी के वरिष्ठ नेता जल्द ही इस मामले का कोई सकारात्मक समाधान निकाल लेंगे। फिलहाल कांग्रेस नेतृत्व इस पूरी स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है।
किसे मिला कौन सा विभाग?
इस नए कैबिनेट फेरबदल के तहत मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने अपने पास वित्त, मंत्रिमंडल मामले, कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार विभाग (डीपीएआर) और खुफिया विभाग जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां रखी हैं। वहीं यतींद्र सिद्धारमैया को शहरी विकास, जी. परमेश्वर को राजस्व और खेल, के.एच. मुनियप्पा को खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति, तथा के.जे. जॉर्ज को ऊर्जा और पर्यटन विभाग सौंपा गया है। बड़े एवं मध्यम उद्योगों की जिम्मेदारी एम.बी. पाटिल को मिली है, जबकि सतीश जारकीहोली को लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) दिया गया है। प्रियंक खरगे को गृह विभाग (खुफिया शाखा छोड़कर), आईटी-बीटी और ई-गवर्नेंस की कमान सौंपी गई है। इसके अलावा यू.टी. खादर को स्वास्थ्य, बैराथी सुरेश को परिवहन, शरण प्रकाश पाटिल को चिकित्सा शिक्षा और ईश्वर खंड्रे को ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की जिम्मेदारी दी गई है।

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