राजेंद्र भारती की सदस्यता रद्द, दतिया विधायक अब नहीं रहेंगे कांग्रेस सदस्य
MP News: मध्य प्रदेश में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है. एफडी घोटाला मामले में कोर्ट से 3 साल की सजा होने के बाद दतिया कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती की विधानसभा सदस्यता को खत्म कर दिया गया. विधानसभा सचिवालय ने उनकी सदस्यता खत्म करने का आदेश जारी किया है और दतिया विधानसभा सीट को रिक्त घोषित कर दिया.
प्रमुख सचिव ने देर रात जारी किया आदेश
दरअसल, राजेंद्र भारती को 27 साल पुराने एफडी हेराफेरी मामले में दिल्ली की एमपी-एमएलए कोर्ट ने 3 साल की सजा सुनाई थी. वहीं कोर्ट उन्हें जमानत भी दे दी थी और 60 दिनों में अपील दायर करने को कहा था. कोर्ट के फैसले के बाद कल देर रात भोपाल विधानसभा प्रमुख सचिव अरविंद शर्मा सचिवालय पहुंचे और राजेंद्र भारती की सदस्यता खत्म करने का आदेश जारी कर दिया.

जीतू पटवारी समेत कांग्रेस नेताओं ने किया विरोध
आदेश जारी होने के बाद देर रात कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी और पूर्व मंत्री पीसी शर्मा समेत कई अन्य नेताओं ने सचिवालय पहुंचकर आदेश के खिलाफ विरोध दर्ज किया. कांग्रेस नेताओं का कहना है कि कोर्ट में अपील दायर करने के लिए 60 दिन का समय है, उसके बाद भी देर रात सचिवालय खोलकर आदेश जारी करने की क्या जरूरत थी.
इस पूरे घटनाक्रम पर कांग्रेस ने आरोप और सुप्रीम कोर्ट के नियामों का हवाला भी दिया है. फिलहाल आदेश के बाद दतिया विधानसभा सीट खाली हो चुकी है और यहां उप चुनाव होने का रास्ता खुल गया है.
क्या है पूरा मामला?
2011 में बैंक अध्यक्ष बने भाजपा नेता पप्पू पुजारी ने इस मामले को सबके सामने रखा. पूरे मामले के सामने आने के बाद सहकारिता विभाग के तत्कालीन संयुक्त पंजीयक अभय खरे ने जांच की और एफडी पर ऑडिट की आपत्ति दर्ज की गई. इसके बाद 2012 में राजेंद्र भारती ने बैंक से एफडी की राशि मांगी गई, लेकिन बैंक द्वारा ऑडिट आपत्ति के चलते भुगतान करने से मना कर दिया गया.
भुगतान न मिलने पर राजेंद्र भारती उपभोक्ता फारेम गए, जहां से उन्हें राहत नहीं मिल पाई. इसके बाद मामला राज्य उपभोक्ता फारेम और सुप्रीम कोर्ट भी पहुंचा, लेकिन उन्हें राहत नहीं मिली. इसके बाद राजेंद्र भारती पर 2015 में तत्कालीन कलेक्टर प्रकाशचंद्र जांगड़े आपराधिक मामला दर्ज करने की अपील की, जिसके बाद कोर्ट के आदेश अनुसार आईपीसी की अलग-अलग धाराओं में भारती पर केस दर्ज हुआ.
एमपी-एमएलए कोर्ट के गठन के बाद मामला ग्वालियर पहुंच गया और अक्टूबर 2025 में इसे दिल्ली एमपी-एमएलए कोर्ट में भेज दिया गया.

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