मध्यप्रदेश में प्रशासनिक चुनौती, IAS पदों में भारी कमी
भोपाल। किसी भी राज्य के प्रशासनिक कामकाज को सही तरीके से करने के लिए अफसरशाही जिम्मेदार होती है. सरकार नीतियां बना देती हैं लेकिन उसे धरातल पर उतारने के लिए अफसरों के कंधों पर जिम्मा होता है. किसी विभाग में अधिकारियों की तय संख्या में कमी होती है तो इसका प्रभाव काम पर पड़ता है. इस समय मध्य प्रदेश IPS और IAS की कमी से जूझ रहा है।
IAS की कमी के मामले में दूसरा स्थान
केंद्र सरकार ने राज्यों में अफसरों की संख्या को लेकर संसद में रिपोर्ट पेश की. इस रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) और भारतीय पुलिस सेवा (IPS) दोनों में अधिकारियों की कमी है. IAS की कमी के मामले में तो मध्य प्रदेश देश में दूसरे स्थान पर है. वहीं, IPS के मामले में हालात अच्छे नहीं हैं, 15 फीसदी पद खाली पड़े हुए हैं।
एमपी में कितने अधिकारियों की कमी है?
- मध्य प्रदेश में IAS के 459 पद स्वीकृत हैं. इनमें से 391 पदों पर अफसर तैनात हैं, बाकी 68 पोस्ट खाली हैं।
- IAS अफसरों की सबसे ज्यादा कमी उत्तर प्रदेश में है, जिनकी संख्या 81 है. इसके बाद एमपी का नंबर आता है यानी देश में दूसरा स्थान पर है।
- एमपी में IPS के 319 पद स्वीकृत हैं. इसमें से 271 पदों पर अधिकारी पदस्थ हैं. वहीं, 48 पद खाली हैं।
- IPS अफसरों की सबसे ज्यादा कमी AGMUT (गोवा, मिजोरम, अरुणाचल प्रदेश और केंद्र शासित प्रदेश कैडर) में है, जहां 115 पदों की रिक्ति है. पश्चिम बंगाल दूसरे स्थान, ओडिशा तीसरे स्थान पर है. इस मामले में एमपी का स्थान चौथा है।
- IAS संवर्ग में खाली पदों के मामले में यूपी पहला स्थान पर है. जहां 652 अधिकारियों के मुकाबले 571 अफसर तैनात हैं।

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