रामगंजमंडी से भोपाल तक ट्रेन का ट्रायल रन, रेल सेवा की तैयारी तेज
भोपाल। रामगंजमंडी से भोपाल तक बनने वाली बहुप्रतीक्षित रेलवे लाइन को लेकर लंबे समय से चल रहा इंतजार अब खत्म होता नजर आ रहा है. राजगढ़ और खिलचीपुर के बीच तैयार ट्रैक पर आज पहली बार ट्रायल प्रक्रिया शुरू की गई, जिससे इस परियोजना के जल्द शुरू होने की उम्मीद और मजबूत हो गई है. ट्रायल से पहले खिलचीपुर स्टेशन पर विधिवत पूजन-अर्चना की गई, जिसके बाद अधिकारियों ने ट्रॉली निरीक्षण की शुरुआत की।
तेजी से आगे बढ़ रहा निर्माण कार्य
इस रेलवे प्रोजेक्ट पर पिछले कुछ समय से तेजी से काम किया जा रहा है. राजस्थान सीमा के बाद अब मध्य प्रदेश के हिस्से में भी ट्रैक बिछाने, पुल-पुलिया और अंडरपास निर्माण का कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है. खिलचीपुर तक ट्रैक पहले ही तैयार हो चुका था, जबकि अब खिलचीपुर से राजगढ़ तक का हिस्सा भी पूरी तरह से बनकर तैयार हो गया है।
निरीक्षण के लिए पहुंची अधिकारियों की टीम
मंगलवार, 18 मार्च को मध्य परिमंडल के रेल संरक्षा आयुक्त गुरू प्रकाश के नेतृत्व में अधिकारियों की टीम ने निरीक्षण की प्रक्रिया शुरू की. जबलपुर से आई विशेष ट्रेन खिलचीपुर होते हुए राजगढ़ पहुंची. इसके बाद अधिकारी ट्रेन को राजगढ़ में खड़ा कर सड़क मार्ग से वापस खिलचीपुर आए और वहां से ट्रॉली के जरिए पूरे ट्रैक का निरीक्षण शुरू किया, जो दोपहर तक राजगढ़ पहुंचने की संभावना है।
शाम को स्पीड ट्रायल का कार्यक्रम
निरीक्षण प्रक्रिया पूरी होने के बाद शाम करीब 4 बजे अधिकारी राजगढ़ से ट्रेन में सवार होकर खिलचीपुर की ओर रवाना होंगे. इस दौरान ट्रेन की रफ्तार 100 से 110 किलोमीटर प्रति घंटे तक रहने का अनुमान है. ट्रायल के जरिए ट्रैक की गुणवत्ता और क्षमता का आकलन किया जाएगा, जिसके आधार पर आगे ट्रेन संचालन की गति तय होगी. इस दूरी को तय करने में लगभग 25 मिनट लगने की संभावना जताई जा रही है।
प्रोजेक्ट की खास बातें और लागत
यह रेलवे लाइन पूरी तरह इलेक्ट्रिक होगी और रामगंजमंडी से भोपाल के बीच कुल 16 स्टेशन विकसित किए जाएंगे. परियोजना में 4 बड़े पुल, 24 छोटे पुल, 2 रेलवे ओवरब्रिज और 2 सुरंगों का निर्माण शामिल है. करीब 262 किलोमीटर लंबी इस लाइन पर ट्रेनें 110 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ सकेंगी. शुरू में इस परियोजना की लागत 424 करोड़ रुपये आंकी गई थी, लेकिन बाद में संशोधन के बाद यह बढ़कर 3032.46 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है. यह प्रोजेक्ट प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्राथमिकता वाली योजनाओं में भी शामिल है, जिससे इसके महत्व का अंदाजा लगाया जा सकता है।

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