नौकरी पाने के डर से महिलाएं इंटरव्यू में छिपाती हैं शादी-मातृत्व की योजना
कार्यस्थल में महिलाओं के लिए चुनौतियां अब भी बनी हुई हैं। लगभग 50 प्रतिशत महिलाओं ने बताया कि वे नौकरी के इंटरव्यू के दौरान शादी या मातृत्व से जुड़ी अपनी निजी योजनाओं को छिपाती हैं, क्योंकि उन्हें पक्षपात का डर होता है। अनुभव के साथ यह झिझक और बढ़ जाती है। जहां फ्रेशर्स में यह आंकड़ा 29 प्रतिशत है, वहीं 10 से 15 साल के अनुभव वाली महिलाओं में यह 40 प्रतिशत तक पहुंच जाता है। यह जानकारी पोर्टल Naukri.com की ओर से जारी रिपोर्ट 'व्हाट वुमन प्रोफेशनल्स वांट' में सामने आई है। यह रिपोर्ट देश के 50 से अधिक उद्योगों में काम कर रही करीब 50,000 महिलाओं पर किए गए सर्वे के आधार पर तैयार की गई है।
रिपोर्ट के मुताबिक, कार्यस्थल पर भर्ती और प्रमोशन में पक्षपात विविध पृष्ठभूमि की महिलाओं के सामने सबसे बड़ी चुनौती है। करीब 42 प्रतिशत महिलाओं ने इसे प्रमुख समस्या बताया। चेन्नई (44 प्रतिशत) और दिल्ली-एनसीआर (43 प्रतिशत) जैसे महानगरों में भी यही रुझान देखने को मिला। इन चुनौतियों के बावजूद, सर्वे में शामिल 83 प्रतिशत महिलाओं ने कहा कि उन्हें नेतृत्व की भूमिकाओं में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहन मिलता है, जो पिछले साल के 66 प्रतिशत के मुकाबले काफी अधिक है।
कार्यस्थलों में वेतन को लेकर क्या है स्थिति?
- वहीं देश में विभिन्न क्षेत्रों में काम कर रही 67 प्रतिशत महिलाओं का मानना है कि उनके कार्यस्थलों पर वेतन समानता मौजूद है।
- रिपोर्ट के अनुसार, रियल एस्टेट सेक्टर में सबसे अधिक महिलाओं (42 प्रतिशत) ने माना कि उनके कार्यस्थल पर वेतन समानता है।
- इसके बाद एफएमसीजी (38 प्रतिशत), फार्मास्यूटिकल और लाइफ साइंसेज (38 प्रतिशत) व ऑटोमोबाइल सेक्टर (37 प्रतिशत) का स्थान रहा।
- इसके अलावा रिटेल (35 प्रतिशत), होटल और रेस्टोरेंट (35 प्रतिशत), आईटी सर्विसेज और कंसल्टिंग (34 प्रतिशत), टेलीकॉम/आईएसपी (34 प्रतिशत), मेडिकल सर्विसेज/अस्पताल (33 प्रतिशत) और ऑयल एंड गैस (33 प्रतिशत) क्षेत्रों की महिलाओं ने भी कार्यस्थलों पर वेतन समानता होने की बात कही।
वेतन ऑडिट और मेंस्ट्रुअल लीव को लेकर क्या है मांग?
रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि समान वेतन ऑडिट और मेंस्ट्रुअल लीव की मांग बढ़ रही है। इस तरह की मांग पिछले साल के 19 प्रतिशत से बढ़कर 27 प्रतिशत तक पहुंच गई है। खास तौर पर अधिक वेतन पाने वाली महिलाओं (48 प्रतिशत) के बीच यह मांग सबसे ज्यादा देखी गई। इंफो एज इंडिया ग्रुप के ग्रुप सीएमओ सुमीत सिंह ने कहा कि इस रिपोर्ट का हर आंकड़ा एक महत्वाकांक्षी महिला की कहानी बताता है। उन्होंने कहा कि जहां 83 प्रतिशत महिलाओं का नेतृत्व के लिए प्रोत्साहित होना सकारात्मक संकेत है, वहीं इंटरव्यू में आधी महिलाओं का शादी या मातृत्व की योजनाएं छिपाना यह दर्शाता है कि अभी भी काफी काम बाकी है।

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