लोकसभा में डिप्टी स्पीकर का पद 7 साल से खाली, कांग्रेस सांसद ने उठाए सवाल
नई दिल्ली। कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार में लोकसभा डिप्टी स्पीकर का पद सात साल से खाली रहने पर गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि यह केवल एक प्रक्रियात्मक चूक नहीं, बल्कि संसदीय लोकतंत्र की मूल भावना के खिलाफ किया जा रहा कार्य है।
सांसद टैगोर ने संविधान के अनुच्छेद 93 का हवाला देते हुए कहा कि सदन को एक स्पीकर और एक डिप्टी स्पीकर का चुनाव करना अनिवार्य है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इसमें “शेल” शब्द का प्रयोग किया गया है, जो बाध्यता दर्शाता है, न कि विकल्प। इसी के साथ ही कांग्रेस सांसद ने कहा कि संसदीय परंपरा के अनुसार डिप्टी स्पीकर का पद आमतौर पर विपक्ष को दिया जाता है, ताकि सदन की कार्यवाही में संतुलन, निष्पक्षता और लोकतांत्रिक मूल्यों का सम्मान सुनिश्चित हो सके।
उन्होंने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव के संदर्भ में भी सवाल उठाए। टैगोर ने आरोप लगाया कि सरकार ने जानबूझकर डिप्टी स्पीकर का पद खाली रखा है। उनका कहना था, जब स्पीकर के खिलाफ नो-कॉन्फिडेंस मोशन लाया गया है, तब डिप्टी स्पीकर का न होना इस खालीपन को और स्पष्ट करता है। क्या यह जवाबदेही से बचने का प्रयास है?
सांसद टैगोर ने कहा कि विपक्ष को उसकी संवैधानिक और परंपरागत भूमिका से दूर रखना लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि लोकतंत्र किसी एक व्यक्ति या पार्टी के बारे में नहीं, बल्कि संविधान के सम्मान के बारे में है।

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