MP सरकार का मितव्ययी फैसला, नियुक्ति टालने से 25 करोड़ रुपये बचे
भोपाल। मध्य प्रदेश में निगम-मंडल, आयोग, बोर्ड और प्राधिकरणों में राजनीतिक नियुक्तियों पार्टी के दिग्गज नेता दो साल से भले ही इंतजार कर रहे हों लेकिन इन संस्थाओं के कामकाज पर कोई फर्क नहीं पड़ा. इस दौरान दर्जा प्राप्त मंत्री व राज्यमंत्रियों के वेतन भत्ते, आवास, वाहन और स्टाफ आदि पर होने वाला करीब 25 करोड़ रुपये का खर्च भी बचे हैं।
घाटे में चल रही कई संस्थाएं
घाटे में चल रहे कई निगम-मंडल सरकारी खजाने पर सफेद हाथी ही साबित हो रहे हैं. ऊपर से इस तरह के खर्चों से उनकी आर्थिक बदहाली ही बढ़ रही है. प्रदेश में नियुक्तियों के लिए कुल संस्थाओं की संख्या 62 है. कुछ संस्थाओं में अध्यक्ष-उपाध्यक्ष तैनात भी हैं. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेश की कमान संभालने के 4 महीने बाद (फरवरी 2024)46 दर्जा मंत्रियों की नियुक्तियां निरस्त कर दी थीं. इसके बाद से सियासी नियुक्तियों के लिए नेता दिल्ली की परिक्रमा में जुटे हैं।
ये हैं सुविधाएं और खर्च
दर्जा प्राप्त मंत्री-राज्यमंत्रियों का वेतन-भत्ता, आवास, वाहन व मेडिकल सहित अन्य सुविधाओं पर औसतन 10-12 लाख रुपए सालाना खर्च पड़ता है. वहीं, बोर्ड सदस्यों को मीटिंग व प्रवास के लिए भत्ते की पात्रता है.अध्यक्ष-उपाध्यक्षों के लिए मानदेय व प्रीमियम-मीडियम सेगमेंट की गाड़ी किराया 50-60 हजार रुपए प्रतिमाह, भृत्य, माली, सहायक, ड्राइवर दो-ढाई हजार किमी यात्रा का ईंधन. यदि पीएसओ लेते हैं तो उसका व्यय अलग।
घाटे-फायदे वालीं संस्थाएं
बीज एवं फार्म विकास, लघु उद्योग, स्टेट सिविल सप्लाई कार्पोरेशन, पशु पालन कुक्कुट और स्टेट इलेक्ट्रानिक विकास सहित कई निगम मंडल घाटे में चल रहे है. खनिज और वन विकास निगम फायदे में हैं. प्राधिकरणों में योजनाओं के हिसाब से लाभ-हानि का हिसाब है. बीडीए फिलहाल फायदे में चल रहा है. सरकारी खजाने पर भार 50 संस्थाओं में अध्यक्ष-उपाध्यक्षों का खर्च जोड़ें तो दो साल में सरकार के खजाने पर करीब 24-25 रुपए खर्च होता जो बच गया. नियुक्तियों का मामला लगातार टलता जा रहा है. इस मुद्दे पर सत्ता-संगठन के प्रमुख नेता हाईकमान के साथ भी कई मर्तबा बैठकें कर चुके हैं।

अम्बिकापुर में विकास को नई रफ्तार
ड्रोन के साथ अपने हौसलों को उड़ान दे रही हैं सरूपी मीणा
अल्पविराम की अवधारणा जीवन और कार्य के संतुलन के लिये अत्यंत आवश्यक : अर्गल
चिन्हारी योजना से सशक्त हो रही छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति
जल जीवन मिशन से संवरी बुलगा की तस्वीर, जीवंती बाई के घर तक पहुँचा शुद्ध पेयजल
नगरीय निकायों के कायाकल्प और वित्तीय सुदृढ़ीकरण के लिये दो दिवसीय "शहरी सुधार कार्यशाला" का हुआ समापन
संकल्प से समाधान अभियान’ से त्वरित, प्रभावी और पारदर्शी निराकरण हुआ सुनिश्चित : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
यूरिया का प्रभावी विकल्प बन रही हरी खाद, जशपुर में 600 हेक्टेयर में प्रदर्शन
फॉरेस्ट ग्राउंड में बना बॉक्स क्रिकेट ग्राउंड युवाओं को खेल के प्रति प्रोत्साहित और अनुशासित कर रहा
माता-पिता के संस्कार और गुरूओं से प्राप्त ज्ञान के प्रति सदैव रहें कृतज्ञ : राज्यपाल पटेल