शतरंज चैंपियनशिप में मोहिनी पंडित की प्रेरक जीत की कहानी
नोएडा| शतरंज चैंपियनशिप में सीनियर वर्ग की विजेता मोहिनी पंडित ने अपने जज्बे से गिलियन बैरे सिंड्रोम (जीबीएस) को हराकर चैंपियनशिप अपने नाम की है। नोएडा निवासी मोहिनी की फिडे स्टैंडर्ड रैंकिंग 1590 और रैपिड रैंकिंग 1421 है। वह ग्रैंडमास्टर बनकर भारत का नाम रोशन करना चाहती हैं। महामाया बालिका इंटर कॉलेज की छात्रा मोहिनी को वर्ष 2022 में पैरालैसिसि का अटैक पड़ा था। इसके बाद से वह अपने पैरों पर खड़ी नहीं हो सकीं। उन्हें अस्पताल ले जाया गया। जांच में मोहिनी के दुर्लभ बीमारी गिलियन बैरे सिंड्रोम से पीडि़त होने की जानकारी सामने आई। यह ऑटोइम्यून बीमारी है जो शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली व नसों पर हमला करती है। तीन माह तक दिल्ली के एम्स अस्पताल में उपचार चला। पिता अमरेंद्र पंडित गेम्स टीचर हैं। परिवार ने मोहिनी का हौसला बढ़ाया। लगभग छह माह के उपचार के बाद मोहिनी की रिकवरी शुरू हुई। वर्ष 2023 में उसकी वापसी भी स्कूल में व्हीलचेयर पर हुई। अभी भी उसका एड़ी और घुटने का मूवमेंट ठीक नहीं है। इससे बचाव के लिए फिजियोथेरपी व उपचार जारी है।बीमारी से नहीं मानी हार, दमदार वापसी लगभग एक वर्ष तक बीमारी से लड़ाई के बाद मोहिनी ने शतरंज की बिसात पर वापसी करते हुए अंडर-13 शतरंज प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीता। इसके बाद गोवा में आयोजित राष्ट्रीय शतरंज प्रतियोगिता में उत्तर प्रदेश का प्रतिनिधित्व किया। वह बिहार राज्य प्रतियोगिता की अंडर-9, अंडर-11 और अंडर-13 चैंपियन बन चुकी है। अब वह अमर उजाला शतरंज प्रतियोगिता की नोएडा चैंपियन भी बन गई हैं।

राशिफल 26 जुलाई 2026: जानिए आज का दिन आपके लिए कैसा रहेगा
छात्र आंदोलन पर सियासत तेज, राहुल बोले- PM मोदी माफी मांगें, अमित शाह जिम्मेदार
शरद पवार का खुलासा: PM से हुई चर्चा के बाद धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की कहानी में आया मोड़
नौकरी के नाम पर बना बंधक, युवकों की दर्दभरी कहानी सुन पुलिस भी रह गई हैरान
'यहां इस्तीफे नहीं होते'... लेकिन 12 साल में बदलते रहे मंत्री, जानिए पूरी कहानी
सीरिया में बड़ा सड़क हादसा, बस पलटने से 35 लोगों की गई जान
एक साथ 10 इस्तीफे, रालोद में उठे असंतोष के सुर, राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज
'धोखेबाज भतीजे' पर CM शुभेंदु का करारा प्रहार, सेबाश्रय शिविर घोटाले में दी चेतावनी