पुल बना, सड़क नहीं! कोलार का ‘इंजीनियरिंग का नमूना’ जनता को हैरान कर रहा
भोपाल | जनता की सहूलियत के लिए ब्रिज बनकर तैयार हैं लेकिन लोग सोच में है कि एक तरफ से दूसरी ओर कैसे जाएं? ऐसा ही एक ब्रिज भोपाल के कोलार में 5 करोड़ की लागत से बनकर 5 सालों से तैयार हुए है. खास बात है कि ब्रिज तो बन गया लेकिन दूसरी ओर जाने के लिए रास्ता ही नहीं है. अब जनता भी सवाल पूछ रही है कि आखिर ब्रिज का निर्माण किसके लिए किया गया है, क्योंकि ब्रिज बनकर तैयार है फिर कोई इस्तेमाल नहीं कर सकता है. ऐसे में सवाल है कि ब्रिज निर्माण में जनता के 5 करोड़ पानी में बह गए हैं |
वाल्मी के मना करने के बाद भी बना ब्रिज
कलियासोत नदी पर जल एवं भूमि प्रबंधन संस्थान के पास 5 करोड़ रुपये की लागत से बना ब्रिज साल 2018 तैयार है. वाल्मी ने शुरुआत से ही इनकार करता रहा, इसके बावजूद CPA ने पुल बनाकर काम जारी रखा. विधानसभा चुनाव से पहले इसे पूरा कर दिया, जिन इंजीनियरों के काल में ब्रिज बना वह अब रिटायर हो चुके हैं. पिछले 10 साल में एप्रोच रोड के लिए 12 से ज्यादा प्लान बने लेकिन कोई योजना लागू नहीं हुई. जुलाई 2024 में वाल्मी को जैव विविधता परिषद घोषित कर दिया गया जिसमें एप्रोच रोड निकलना मुश्किल हो गया है. अब कोलार के लोग यह पूछ रहे हैं कि वाल्मी ओर से जब रास्ता नहीं बना है तो इस ब्रिज का आखिर क्या होगा?
दो-तीन किमी का चक्कर लगाना पड़ रहा
ब्रिज कोलार से भदभदा और रातीबड़ रोड को जोड़ने के लिए बनाया गया था. इसके चालू होने पर 60 से अधिक कॉलोनी के रहवासियों को फायदा होता. लोगों को करीब 2 किलोमीटर का चक्कर लगाना भी बच सकता था. राजहर्ष सी सेक्टर कॉलोनी के रहवासियों के लिए यह ब्रिज कॉलोनी से बाहर आने-जाने का एकमात्र रास्ता है. पहले यह लोग वाल्मी परिसर के भीतर से आते-आते थे. अब वह बंद हो गया. इन रहवासियों के दबाव में ब्रिज के साइड से 200 मीटर की एप्रोच रोड बना दी गई लेकिन जिन कॉलोनी वासियों के लिए ब्रिज बनाया जाना था. उनके लिए रास्ता ही नहीं है इसलिए वह दो से तीन किलोमीटर का चक्कर लगाकर कोलार पहुंचते हैं |
स्थानीय लोगों का कहना है कि ब्रिज तो काफी समय से बना हुआ है. इसका इस्तेमाल कालोनी के लोग नहीं कर पा रहे है. ऐसा लगता है कि जनता के 5 करोड़ रुपए का नुकसान विकास के नाम पर खर्च कर दिया गया है |
दोषी अफसरों पर कार्रवाई की जाएगी- रामेश्वर शर्मा
इस मामले में विधायक रामेश्वर शर्मा का कहना है कि दो अफसरों के विवाद के कारण ब्रिज का इस्तेमाल नहीं हो सका है. इस मामले में दोषी अफसरों के खिलाफ एक्शन लेते हुए जुर्माना लगाने की कार्रवाई की जाएगी. वहीं कांग्रेस प्रवक्ता भूपेंद्र गुप्ता ने भी ब्रिज का निर्माण और प्लानिंग करने वाले इंजीनियरों पर सवाल उठाते हुए पूछा है कि जनता के टैक्स के पैसों की बर्बादी पर सरकार रोक कब लगाएगी. हालांकि इस मामले में पीडब्ल्यूडी के अधिकारी एसई मयंक शुक्ला से बात की तो उन्होंने कहा कि ब्रिज की दूसरी ओर सड़क के लिए प्रस्ताव भेजा गया है लेकिन अभी तक वाल्मी की ओर से कोई जवाब नहीं मिला है. हालांकि उन्होंने कहा कि मामला शासन स्तर पर लंबित है.
वैसे भी सिविल इंजीनियरिंग का नमूना आए दिन देखने के लिए मिल रहा है.कभी ब्रिज बनाने के बाद तोड़ने का फैसला हो या फिर 90 डिग्री वाला ऐशबाग ब्रिज. अक्सर ब्रिज का निर्माण सवालों के घेरे में आ जाता है. अब देखना है कि 5 करोड़ के ब्रिज का भविष्य में क्या होता है |

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