9000 हजार साल पुराना दक्षिण भारत का पहला तिरुपति मंदिर! देवताओं ने रखी थी मंदिर की नींव, नारदजी ने की थी मूर्ति स्थापित
दक्षिण भारत में तिरुपति बालाजी मंदिर की महिमा बहुत ज्यादा है, हर भक्त अपनी मनोकामना पूर्ति के लिए इस मंदिर की चौखट पर जरूर आता, लेकिन क्या आप जानते हैं कि तिरुपति बालाजी मंदिर से अधिक पुराना मंदिर आंध्र प्रदेश में मौजूद है? इस मंदिर को पहला और असली तिरुपति मंदिर माना जाता है. हम बात कर रहे हैं आंध्र प्रदेश के काकीनाडा जिले के पास बने श्री श्रृंगरा वल्लभ स्वामी मंदिर की, जो अपने आप में एक इतिहास को संजोए हुए है. बताया जाता है कि देवताओं ने खुद इस मंदिर की नींव रखी थी और महर्षि नारद ने माता लक्ष्मी की मूर्ति स्थापित की थी. मान्यता है कि यहां दर्शन करने मात्र से ही सभी इच्छाएं पूरी हो जाती हैं. आइए जानते हैं इस मंदिर के बारे में खास बातें…
श्री श्रृंगरा वल्लभ स्वामी मंदिर
श्री श्रृंगरा वल्लभ स्वामी मंदिर को ‘थोली तिरुपति’ मंदिर भी कहा जाता है. ‘थोली तिरुपति’ का मतलब है पहला तिरुपति. यह मंदिर इसलिए भी खास है क्योंकि मंदिर में भगवान वेंकटेश्वर की मुस्कुराती प्रतिमा मौजूद है, जो उम्र में ऊंचाई के साथ अलग-अलग नजर आती है. भगवान वेंकटेश्वर की मुस्कुराती प्रतिमा को लेकर कहा जाता है कि अगर प्रतिमा को बच्चे देखते हैं तो वे उन्हें बाल रूप में नजर आते हैं और जब बड़े भक्त देखते हैं, तो वे बड़े वेंकटेश्वर के रूप में दर्शन देते हैं.
भगवान वेंकटेश्वर की प्रतिमा स्वयंभू
मंदिर में मौजूद भगवान वेंकटेश्वर की प्रतिमा स्वयंभू है. प्रतिमा में शंख-चक्र भी तिरुमला बालाजी से उल्टी दिशा में है. तिरुमला बालाजी में दाईं तरफ सुदर्शन चक्र और बाईं तरफ शंख है, लेकिन श्री श्रृंगरा वल्लभ स्वामी मंदिर में दोनों की उपस्थिति उल्टी है. 9000 साल पुराने मंदिर के निर्माण को लेकर भी कहा जाता है कि मंदिर की नींव खुद देवी-देवताओं ने रखी थी, जिसके बाद धीरे-धीरे मंदिर का निर्माण हुआ. कहा जाता है कि महर्षि नारद ने देवी लक्ष्मी की मूर्ति स्थापित की थी. पहले मंदिर में भगवान वेंकेटश्वर अकेले थे, जिसके बाद नारद महर्षि ने मंदिर को पूर्ण करने के लिए मां लक्ष्मी के रूप में देवी भूदेवी की स्थापना की.
मंदिर में मौजूद शिलालेख
मंदिर में कुछ शिलालेख भी मौजूद हैं, जो मंदिर के इतिहास को दिखाते हैं. शिलालेखों पर पुरानी तमिल भाषा में मंदिर के इतिहास के बारे में लिखा है. खास बात ये है कि मंदिर के प्रांगण में एक कुआं मौजूद है, जिसे चमत्कारी कुआं कहा जाता है. कुएं के पानी में 15 जड़ी-बूटियों का मिश्रण होने का दावा किया जाता है और मंदिर के प्रसाद को बनाने में इसी पानी का प्रयोग सदियों से होता आया है. इस कुएं का पानी स्वाद में मीठा होता है. भक्त शरीर की बीमारियों से निजात पाने के लिए कुएं का पानी अपने साथ भी लेकर जाते हैं. मंदिर में बड़ा मंडपम भी मौजूद है, जो कि कई स्तंभों के सहारे खड़ा है. स्तंभ पर भगवान विष्णु के अलग-अलग रूपों की प्रतिमा अंकित की गई है.

नौकरी के नाम पर बना बंधक, युवकों की दर्दभरी कहानी सुन पुलिस भी रह गई हैरान
'यहां इस्तीफे नहीं होते'... लेकिन 12 साल में बदलते रहे मंत्री, जानिए पूरी कहानी
सीरिया में बड़ा सड़क हादसा, बस पलटने से 35 लोगों की गई जान
एक साथ 10 इस्तीफे, रालोद में उठे असंतोष के सुर, राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज
'धोखेबाज भतीजे' पर CM शुभेंदु का करारा प्रहार, सेबाश्रय शिविर घोटाले में दी चेतावनी
धर्मेंद्र प्रधान विवाद के बीच मायावती का बड़ा कमेंट, पार्टी कैडर को किया सतर्क
PhonePe की आय में 11% ग्रोथ, फिर भी घाटा 62% बढ़ा
नई कार्यकारिणी के जरिए मिशन चुनाव की तैयारी, यूपी कांग्रेस जल्द करेगी बड़ा ऐलान