डिजिटल वित्तीय प्रणाली को देंगे नई गति : उप मुख्यमंत्री देवड़ा
भोपाल : उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने कहा कि प्रदेश की वित्तीय प्रणाली को पूर्ण रूप से डिजिटल और पारदर्शी स्वरूप देने के लिये राज्य तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने मध्यप्रदेश में डिजिटल करेंसी के उपयोग को बढ़ावा देने के लिये आवश्यक कानूनी और वित्तीय प्रक्रियाएँ शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश दिए। उप मुख्यमंत्री देवड़ा ने यह भी कहा कि पेंशन प्रकरणों को संपूर्ण रूप से डिजिटाइज किया जाएगा। इससे लाखों पेंशनरों को त्वरित और सरल सेवाएँ उपलब्ध हो सकेंगी।
उप मुख्यमंत्री देवड़ा मंगलवार को मंत्रालय में वित्त विभाग की गतिविधियों की उच्च स्तरीय समीक्षा कर रहे थे। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में विगत 2 वर्षों के दौरान प्रदेश का वित्तीय ढांचा अधिक सक्षम, तकनीक-सम्मत और सेवा उन्मुख हुआ है। पेंशन व्यवस्था में किए गए सुधारों के परिणामस्वरूप अब पेंशन भुगतान एसबीआई द्वारा एग्रीगेटर मॉडल में किया जा रहा है। इससे पेंशनरों को किसी भी बैंक खाते में राशि प्राप्त करने की सुविधा मिल रही है।
उपमुख्यमंत्री देवड़ा ने बताया कि सिंगल नोडल एजेंसी प्रणाली के प्रभावी क्रियान्वयन से मध्यप्रदेश देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हुआ है। इस उपलब्धि से राज्य को 500 करोड़ रुपये का प्रोत्साहन प्राप्त हुआ है और 66 में से 47 केंद्र प्रवर्तित योजनाओं की स्वीकृतियाँ जारी हो चुकी हैं। उन्होंने कहा कि डिजिटल भुगतान प्रणाली आज प्रदेश में अधिक त्वरित, सुरक्षित और विश्वसनीय बन चुकी है। उन्होंने वित्तीय प्रबंधन प्रक्रियाओं को पूर्णतः डिजिटल स्वरूप देने के लिये आईएफएमएस नेक्स्ट जेन को निर्धारित समय सीमा में लागू करने के निर्देश दिए। उप मुख्यमंत्री देवड़ा ने विभागों, कोषालयों तथा आहरण एवं संवितरण अधिकारियों के मध्य बेहतर समन्वय स्थापित कर भुगतान प्रक्रियाओं को और अधिक पारदर्शी एवं सटीक बनाने की आवश्यकता पर बल दिया।
बैठक में बताया गया कि मध्यप्रदेश ने सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (सीबीडीसी) का सफल पायलट प्रोजेक्ट पूरा कर लिया है। यह भविष्य में बगैर नकद रकम के लेनदेन, कल्याणकारी योजनाओं के भुगतान में पारदर्शिता और वित्तीय प्रक्रियाओं की गति बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इसे आगामी समय में आईएफएमएस नेक्स्ट जेन से जोड़कर प्रमुख योजनाओं में लागू किया जाएगा।
सेवानिवृत्त कर्मचारियों के लिये ई-जीपीएफ प्रणाली बड़ी राहत के रूप में उभर रही है। महालेखाकार कार्यालय द्वारा प्राधिकृत पत्र जारी होते ही भुगतान सीधे ऑनलाइन हो जाता है तथा अब तक 5,000 से अधिक मामलों में इसका सफल उपयोग किया जा चुका है। इस प्रणाली को अब 57,000 कर्मचारियों तक विस्तारित किया जा रहा है। इससे सेवानिवृत्ति के बाद मिलने वाले वित्तीय लाभ समय पर प्राप्त हो सकेंगे।
वित्तीय निरीक्षण एवं सेवा-प्रदान को और मजबूत करने के लिये पांदुर्णा, मऊगंज और मैहर में 3 नए कोषालय स्वीकृत किए गए हैं। साथ ही चम्बल, नर्मदापुरम और शहडोल में स्थानीय निधि संपरीक्षा संचालनालय के क्षेत्रीय कार्यालय स्थापित किए जा रहे हैं, जिससे विभागीय निगरानी और सेवा-सुगमता बढ़ेगी।
बैठक में अपर मुख्य सचिव वित्त मनीष रस्तोगी, सचिव लोकेश कुमार जाटव, आयुक्त कोष एवं लेखा भास्कर लाक्षाकार, संचालक वित्त राजीव रंजन मीणा, अपर सचिव वित्त रोहित सिंह, संचालक पेंशन जे.के. शर्मा तथा संचालक स्थानीय निधि संपरीक्षा अदिति कुमार त्रिपाठी सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।

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