ऐसा धूमकेतु सामने आया, जो नहीं है सौरमंडल का हिस्सा
वाशिंगटन। हाल के दिनों में अंतरिक्ष में एक ऐसा धूमकेतु सामने आया है जो हमारे सौरमंडल का हिस्सा नहीं है। शोधकर्ता वैज्ञानिकों ने इसे नाम दिया गया है 3आई/एटलस। यह तीसरा ऐसा खगोलीय पिंड जो किसी दूसरे तारामंडल से हमारे सौरमंडल में आया है। वैज्ञानिकों के लिए ऐसे ऑब्जेक्ट बेहद मूल्यवान होते हैं क्योंकि इनके अध्ययन से उन्हें यह समझने का अवसर मिलता है कि अन्य तारामंडलों की रासायनिक और भौतिक संरचना कैसी होती है। इससे पहले 2017 में ‘ओउमुआमुआ’ और 2019 में ‘2I/बोरिसोव’ को इसी श्रेणी में दर्ज किया गया था।
29 अक्टूबर को जब 3आई/एटलस सूरज के सबसे करीब पहुंचा, तब वैज्ञानिकों ने अनुमान लगाया था कि इसकी चमक सामान्य रूप से बढ़ेगी। लेकिन यह धूमकेतु उम्मीद से कहीं अधिक तेज रोशनी बिखेरने लगा। इसकी चमक में आई असामान्य वृद्धि ने विशेषज्ञों को हैरान कर दिया। आमतौर पर किसी धूमकेतु की बर्फ सूरज की गर्मी से पिघलकर गैस में बदल जाती है, जिससे धूल और गैस का बादल बनता है और धूमकेतु चमकने लगता है। मगर3आई/एटलस की चमक बाकी धूमकेतुओं की तुलना में कई गुना ज्यादा बढ़ी, जिसकी वजह फिलहाल रहस्य बनी हुई है। इस घटना पर नासा के कई सैटेलाइट्स स्टेरियो-ए, 3आई/एटलस -बी, सोहो और गोज-19 लगातार नजर रखे हुए हैं। वर्तमान में इसे पृथ्वी से देखा नहीं जा सकता क्योंकि यह सूरज की रोशनी के बेहद पास है।
वैज्ञानिकों का अनुमान है कि नवंबर 2025 के मध्य या अंत तक जब यह सूरज की चमक से बाहर निकलेगा, तब इसे फिर से टेलिस्कोप से देखा जा सकेगा। वैज्ञानिकों का मानना है कि इसकी असामान्य चमक के पीछे दो प्रमुख कारण हो सकते हैं। पहला, यह सूरज की ओर इतनी तेज़ी से बढ़ रहा है कि इसकी सतह पर गैस और बर्फ की प्रतिक्रियाएं अत्यधिक हो गई हैं। दूसरा, इसकी रासायनिक बनावट बाकी धूमकेतुओं से अलग हो सकती है संभव है कि इसमें कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा अधिक हो, जिसने सूरज के नजदीक आने तक पानी की बर्फ को ठंडा रखा और फिर अचानक तीव्रता से प्रतिक्रिया शुरू कर दी। भविष्य में 3आई/एटलस कैसा व्यवहार करेगा, यह अब भी अनिश्चित है।

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