चीन ने ब्रह्मपुत्र पर दुनिया का सबसे बड़ा 'जल बम' बनाने का काम शुरू कर दिया
यह दुनिया में सबसे बड़ा होगा; 12 लाख करोड़ रुपए लागत
बीजिंग। चीन ने तिब्बत में ब्रह्मपुत्र नदी (चीन में यारलुंग सांगपो) पर दुनिया का सबसे बड़ा डैम बनाना शुरू कर दिया है। शनिवार को चीन के प्रधानमंत्री ली क्यांग ने इसकी शुरुआत की। इसकी कुल लागत करीब 167.8 अरब डॉलर (लगभग 12 लाख करोड़ रुपए) बताई गई है। यह डैम अरुणाचल प्रदेश की सीमा से सटे न्यिंगची शहर में बनाया जा रहा है। इसे लेकर भारत और बांग्लादेश दोनों ने गहरी चिंता जताई गई है।
चीन की सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के मुताबिक परियोजना में पांच सीढ़ीदार (कैस्केड) जलविद्युत स्टेशन होंगे। इससे हर साल 300 अरब किलोवॉट-घंटे से अधिक बिजली पैदा होगी। इस बिजली से 30 करोड़ लोगों की जरूरतों को पूरा किया जा सकता है।
संवेदनशील क्षेत्र में बन रहा बांध
बीते साल 18 दिसंबर को भारत और चीन के सीमा संबंधी विशेष प्रतिनिधियों (एसआर) एनएसए अजीत डोभाल और चीनी विदेश मंत्री वांग यी के बीच हुई वार्ता में सीमा पार नदियों के आंकड़ों को साझा करने का मुद्दा उठा था। ब्रह्मपुत्र बांध से इंजीनियरिंग से जुड़ी भारी चुनौतियां पैदा होती हैं, क्योंकि प्रोजेक्ट साइट टेक्टोनिक प्लेट सीमा पर स्थित है, जहां काफी भूकंप आते हैं। तिब्बती पठार, जिसे विश्व की छत माना जाता है, टेक्टोनिक प्लेटों के ऊपर स्थित होने के कारण अक्सर भूकंप का अनुभव करता है। लेकिन पिछले साल दिसंबर में एक आधिकारिक बयान में भूकंप संबंधी चिंताओं को दूर करने की कोशिश करते हुए कहा गया कि हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट सुरक्षित है तथा इसमें इकोलॉजिकल प्रोटेक्शन का ध्यान रखा गया है।
अरुणाचल सीएम ने बताया वाटर बम
इसमें कहा गया है कि जियोलॉजिकल सर्वे और तकनीकी प्रोग्रेस के जरिए प्रोजेक्ट के विज्ञान-आधारित, सुरक्षित और उच्च-गुणवत्ता वाले विकास के लिए एक ठोस आधार तैयार किया गया है। ब्रह्मपुत्र नदी तिब्बती पठार से होकर बहती है और पृथ्वी पर सबसे गहरी घाटी बनाती है। यह बांध सबसे ज्यादा वर्षा वाले क्षेत्रों में से एक में बनाया जाएगा। अरुणाचल के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने हाल ही में चीन के इस मेगा डैम को भारत के लिए वाटर बम बताया था। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि ये प्रोजेक्ट सिर्फ पर्यावरणीय या जल सुरक्षा का मामला नहीं, बल्कि अस्तित्व के लिए भी खतरा है। उन्होंने कहा कि इस बांध से सैन्य खतरा पैदा होगा और यह सीमावर्ती जनजातियों के जीवन, भूमि और संसाधनों को बर्बाद कर सकता है।
भारत भी ब्रह्मपुत्र पर बना रहा डैम
भारत भी अरुणाचल प्रदेश में इसी नदी पर एक बड़ा डैम बना रहा है। ब्रह्मपुत्र और सतलुज पर जल-प्रवाह डेटा को लेकर भारत-चीन के बीच 2006 से एक्सपर्ट लेवल मैकेनिज्म चल रहा है। पिछले साल दिसंबर में एनएसए अजीत डोभाल और चीनी विदेश मंत्री वांग यी के बीच हुई बातचीत में भी यह मुद्दा उठा था। 2015 में चीन ने तिब्बत में 1.5 अरब डॉलर की लागत वाला जम हाइड्रोपावर स्टेशन शुरू किया था। तब भी भारत ने चिंता जताई थी कि चीन धीरे-धीरे ब्रह्मपुत्र के जलस्तर और दिशा पर कब्जा कर सकता है।

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