भारतीय टैक्टिकल ड्रोन से अब भी दशहत में आंतकी और पाकिस्तान
नई दिल्ली । भारत ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान आधुनिक टैक्टिकल ड्रोन का इस्तेमाल कर पाकिस्तान में आतंकी ठिकानों को सफलतापूर्वक तबाह किया। इससे यह स्पष्ट हो गया कि भारत अब केवल रक्षात्मक रणनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि वह इजरायल की तरह आक्रामक रणनीति अपनाकर दुश्मनों को पहले ही मोर्चे पर मात देगा।
टैक्टिकल ड्रोन यानी छोटे और हल्के युद्धक ड्रोन अब युद्ध की दुनिया का नया चेहरा बन चुके हैं। ये ड्रोन बिना पायलट के चलते हैं और रियल टाइम निगरानी, लक्ष्य की पहचान और सटीक हमला करने में सक्षम होते हैं। भारत, इजरायल और तुर्की तकनीक में अग्रणी देश माने जाते हैं। पहले भारत टैक्टिकल ड्रोन के लिए इजरायल पर निर्भर था और आईएआई सर्चर, हेरॉन और हारोप जैसे ड्रोन इजरायल से मंगाता था। लेकिन बीते दशक में भारत ने ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के तहत टैक्टिकल ड्रोन निर्माण में बड़ी उपलब्धि हासिल की है।
अब भारत में डीआरडीओ, एचएएल, टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स और आइडियाफोर्ज जैसी कंपनियां अत्याधुनिक ड्रोन बना रही हैं। भारत का रुसतम-2 (टपास बीएच-201) एक प्रमुख मेल ड्रोन है, जिसे निगरानी और पहचान मिशनों के लिए तैयार किया गया है। भविष्य में हथियारों से लैस करने की योजना है। वहीं, स्विच यूएवी जैसे हल्के टैक्टिकल ड्रोन पहाड़ी इलाकों और एलएसी पर निगरानी के लिए इस्तेमाल हो रहे हैं। अर्जुन और नेत्र जैसे ड्रोन शहरी इलाकों में लड़ाई और सीमा गश्त में सहायक साबित हो रहे हैं।
इन ड्रोनों ने आतंकवाद विरोधी अभियानों, सीमा सुरक्षा और आपदा प्रबंधन में बड़ी भूमिका निभाई है। हालांकि अब भी कुछ चुनौतियां बनी हुई हैं, जैसे स्वचालित लक्ष्य निर्धारण और डेटा प्रोसेसिंग की क्षमता, लेकिन भारत इन पर तेजी से काम कर रहा है।

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