विकास के लिए ठोस नीति बनाने की आवश्यकता
बरेली । केंद्र सरकार के जातिगत जनगणना कराने के फैसले का ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने स्वागत किया है।
उन्होंने इसे सामाजिक और आर्थिक विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया। मौलाना रजवी ने कहा कि भारत में जातिगत जनगणना का यह पहला बड़ा प्रयास है। इससे पहले 2011 में सामान्य जनगणना हुई थी, और अब जाति आधारित आंकड़े इकट्ठा करने का निर्णय लिया गया है। इस कदम से सरकार को विभिन्न समुदायों की स्थिति, उनकी आबादी और भौगोलिक वितरण की सटीक जानकारी मिलेगी।
मौलाना रजवी ने कहा कि जातिगत जनगणना से यह स्पष्ट होगा कि हिंदू और मुस्लिम समुदायों की कौन-कौन सी बिरादरियां देश के किन-किन इलाकों में रहती हैं और उनकी संख्या कितनी है। इस डेटा के आधार पर सरकार बेहतर योजनाएं बना सकेगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह जनगणना जमीनी हकीकत को सामने लाएगी, जिससे विकास और उत्थान के लिए नीतियां बनाना आसान होगा। खासकर पिछड़ी और वंचित बिरादरियों को उनके पैरों पर खड़ा करने के लिए यह डेटा महत्वपूर्ण साबित होगा। मौलाना ने कहा कि आंकड़े इकट्ठा होने के बाद सरकार को ऐसी योजनाएं लागू करनी चाहिए, जो इन समुदायों को आर्थिक, सामाजिक और शैक्षिक रूप से सशक्त बनाएं।
मुस्लिम समुदाय की स्थिति पर टिप्पणी करते हुए मौलाना रजवी ने कहा कि मुस्लिम समाज की हालत ऐसी है कि वह सुबह कुआं खोदता है और शाम को पानी पीता है। उनकी स्थिति में सुधार के लिए केवल रजिस्टर में नाम दर्ज करना काफी नहीं है। सरकार को ऐसी नीतियां बनानी होंगी, जो मुस्लिम समुदाय को आर्थिक और सामाजिक रूप से मजबूत करें।
उन्होंने कहा कि अगर सरकार सही दिशा में योजनाएं लागू करे, तो वंचित समुदायों की किस्मत बदल सकती है। मौलाना ने इस कदम को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि यह डेटा न केवल नीति निर्माण में मदद करेगा, बल्कि समाज के हर वर्ग के विकास को गति देगा। उन्होंने केंद्र सरकार से अपील की कि इस जनगणना के परिणामों का उपयोग समावेशी विकास के लिए किया जाए, ताकि सभी बिरादरियां प्रगति के पथ पर आगे बढ़ सकें।

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