‘TS बाबा हमारे राजा, महाराजा हैं…’ बयान से बढ़ी सियासी चर्चा
रायपुर: पीसीसी चीफ की रेस में कूदे टीएस सिंहदेव; अमरजीत भगत बोले- 'सरगुजा और आदिवासियों को साधना जरूरी'
रायपुर। छत्तीसगढ़ कांग्रेस में संगठन के नेतृत्व को लेकर एक बार फिर बयानबाजी का दौर शुरू हो गया है। पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव ने सार्वजनिक रूप से प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष (PCC चीफ) बनने की इच्छा जाहिर कर सियासी पारा गरमा दिया है। सिंहदेव के इस बयान के बाद अब पार्टी के भीतर से ही समर्थन और सुझावों के स्वर उभरने लगे हैं, जिसमें पूर्व कैबिनेट मंत्री अमरजीत भगत का बयान काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सिंहदेव की दावेदारी: "मौका मिला तो पीछे नहीं हटूंगा"
अपने बेबाक बयानों के लिए मशहूर टीएस सिंहदेव ने स्पष्ट किया कि यदि वर्तमान अध्यक्ष दीपक बैज को पद से हटाया जाता है और पार्टी उन्हें जिम्मेदारी सौंपती है, तो वे इसके लिए पूरी तरह तैयार हैं। उन्होंने कहा कि अध्यक्ष पद की संभावित सूची में एक नाम उनका भी शामिल रहेगा। उनके इस आत्मविश्वास ने कांग्रेस खेमे में नई चर्चा छेड़ दी है।
अमरजीत भगत का रुख: 'पार्टी जिस पर मेहरबान, वही पहलवान'
सिंहदेव की दावेदारी पर प्रतिक्रिया देते हुए पूर्व मंत्री अमरजीत भगत ने सधा हुआ लेकिन गहरा बयान दिया है।
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राज परिवार का सम्मान: भगत ने कहा कि टीएस बाबा हमारे 'राजा-महाराजा' हैं और उनके परिवार ने सरगुजा अंचल में लंबे समय तक कांग्रेस की मजबूती के लिए काम किया है।
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नेतृत्व का समीकरण: उन्होंने आगे कहा कि चाहे आदिवासी नेता हो, सामान्य वर्ग का या पिछड़ा वर्ग का—अंततः पार्टी आलाकमान जिसे चुनता है, वही कमान संभालता है।
सरगुजा और बस्तर: क्षेत्रीय संतुलन की चुनौती
अमरजीत भगत ने कांग्रेस नेतृत्व को आगाह करते हुए कहा कि बीजेपी ने सरगुजा संभाग से आदिवासी मुख्यमंत्री (विष्णु देव साय) बनाकर बड़ा दांव खेला है। ऐसे में कांग्रेस को भी सरगुजा संभाग पर विशेष ध्यान देना चाहिए। उन्होंने तर्क दिया कि यदि सरगुजा और बस्तर के आदिवासियों को साधने की सही व्यवस्था नहीं की गई, तो पार्टी और जनता के बीच गैप बढ़ सकता है। उन्होंने एक ऐसे अध्यक्ष की जरूरत बताई जो सभी वर्गों को साथ लेकर चल सके।
खुद की दावेदारी पर क्या बोले भगत?
जब अमरजीत भगत से पूछा गया कि क्या वे खुद इस दौड़ में शामिल हैं, तो उन्होंने विनम्रता से इनकार कर दिया।
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कार्यकर्ता की भूमिका: उन्होंने कहा, "मैंने कभी अध्यक्ष बनने के बारे में नहीं सोचा, मैं केवल एक आम कार्यकर्ता हूँ।"
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पार्टी के प्रति निष्ठा: अपने राजनीतिक गुरु स्वर्गीय अजीत जोगी का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि जोगी जी ने नई पार्टी बनाई तब भी वे कांग्रेस छोड़कर नहीं गए। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे हमेशा पार्टी लाइन के साथ रहेंगे और अनुशासनहीनता उन्हें स्वीकार नहीं है।

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